भारत सरकार (Government Of India) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में सरपंचों एवं पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के प्रतिनिधियों को वित्तीय साक्षरता एवं निवेश संबंधी ज्ञान प्रदान करने का कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण जनता को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड तथा अन्य निवेश विकल्पों की वैज्ञानिक समझ उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे धोखाधड़ी से बच सकें और अपनी बचत का सदुपयोग कर सकें। यह कार्यक्रम देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
यह प्रशिक्षण योजना वर्तमान में छह राज्यों – महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, जम्मू-कश्मीर तथा त्रिपुरा में आरंभ की गई है। पंचायती राज मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद स्तर के निर्वाचित प्रतिनिधियों को लक्षित कर इस कार्यक्रम को डिजाइन किया गया है। महाराष्ट्र एवं त्रिपुरा में प्रशिक्षण सत्र पूर्ण हो चुके हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह तेजी से विस्तार ले रहा है। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान (एनआईएसएम) के सहयोग से आयोजित इन सत्रों में सेबी के अधिकृत प्रशिक्षकों एवं पीआरआई संसाधन व्यक्तियों द्वारा जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कार्यशालाएं संचालित की जा रही हैं। जल्द ही इसे देश के समस्त 2.5 लाख पंचायतों तक विस्तारित करने की योजना है, जिससे ग्रामीण भारत की वित्तीय क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय योजना, इक्विटी बाजार में निवेश, म्यूचुअल फंडों का प्रबंधन, बजट निर्माण, बचत की आदतें विकसित करना तथा धोखाधड़ी पूर्ण निवेश योजनाओं से बचाव जैसे आवश्यक विषयों पर दक्ष बनाना है। पंचायती राज मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, “जमीनी स्तर पर निर्वाचित नेताओं को प्रशिक्षित कर हम ग्रामीण आबादी के मध्य शेयर बाजार एवं म्यूचुअल फंड निवेश के लाभ-हानि की जानकारी प्रसारित करने में सक्षम बनाना चाहते हैं।” इस पहल से पंचायत प्रतिनिधि अपने समुदायों में वित्तीय साक्षरता के दूत के रूप में कार्य करेंगे, जो ग्रामीणों को विश्वसनीय निवेश सलाह प्रदान करेंगे। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग प्रथम संपर्क के लिए स्थानीय सरपंचों या पंचायत सदस्यों पर ही भरोसा करते हैं, इसलिए यह कार्यक्रम वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा।
आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पूर्व देश में डीमैट एवं म्यूचुअल फंड खातों की संख्या मात्र 5 करोड़ थी, जो वर्तमान में बढ़कर 13 करोड़ हो चुकी है। हालांकि, यह वृद्धि मुख्यतः शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक सीमित रही है। ग्रामीण भारत की अपार संभावनाओं को देखते हुए, सरकार का यह प्रयास शेयर बाजार में भागीदारी को भौगोलिक रूप से संतुलित एवं समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सेबी के एक अधिकारी ने कहा, “यह कार्यक्रम ग्रामीण निवेशकों की छिपी क्षमता को उजागर करेगा, जिससे समग्र आर्थिक विकास को गति मिलेगी।”
इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में निवेश धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों को सोशल मीडिया आधारित जालसाजियों से बचाने हेतु व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। त्रिपुरा में आयोजित प्रथम सत्र में 100 से अधिक सरपंचों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहां वित्तीय प्रबंधन की बुनियादी अवधारणाओं पर चर्चा हुई। इसी प्रकार, महाराष्ट्र के यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी (याशदा) में आयोजित कार्यशाला ने सफलतापूर्वक समापन किया।
कुल मिलाकर, यह संयुक्त प्रयास भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक वित्तीय बाजारों से जोड़ेगा। सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक गांव में निवेश का ज्ञान पहुंचे, जिससे हर नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त बने। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर समृद्धि लाएगा, बल्कि राष्ट्रीय विकास में भी योगदान देगा।


