नई दिल्ली (New Delhi) स्थित भारत मंडपम (Bharat Mandapam) इस महीने के अंत में एक ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बनेगा, जहां 30 और 31 अक्टूबर को “भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस – BIRC 2025” (Rice Conference) आयोजित किया जाएगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा चावल सम्मेलन होगा, जिसमें भारत सहित कई देशों से 5,000 से अधिक किसान और करीब 1,000 सहकारी संस्थाएं शामिल होंगी।
इस सम्मेलन के मुख्य सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (Kribhco), नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NOCL) और भारतीय बीज सहकारिता समिति लिमिटेड (BBSSL) शामिल हैं। इनमें से Kribhco इस सम्मेलन का सिल्वर स्पॉन्सर है।
यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) और एपीडा (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य भारत की चावल निर्यात क्षमता को प्रदर्शित करना, वैश्विक खाद्य सुरक्षा में उसकी विश्वसनीय भूमिका को रेखांकित करना और कृषि व्यापार में भारत की नेतृत्वकारी स्थिति को सुदृढ़ बनाना है।
KRIBHCO एग्री बिजनेस लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक (व्यवसाय विकास) राजेश पहारिया जैन ने जानकारी दी कि Kribhco देश के चावल निर्यात क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है और साथ ही यह NCEL का प्रमोटर फाउंडर भी है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2025 के बीच Kribhco एग्री बिजनेस लिमिटेड ने अफ्रीकी देशों बेनिन, टोगो, बुर्किना फासो, सेनेगल, कोटे डी आइवर, लाइबेरिया और सिएरा लियोन को कुल 1.36 लाख टन चावल का निर्यात किया है।
IREF के उपाध्यक्ष (राज्य) राजेश जैन ने बताया कि BIRC 2025 अब तक का सबसे बड़ा राइस एक्ज़िबिशन-कम-कॉन्फ्रेंस होगा, जिसमें चावल मूल्य श्रृंखला (rice value chain) से जुड़े सभी हितधारक निर्यातक, आयातक, अनुसंधान संस्थान, तकनीकी संगठन, स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), वित्तीय संस्थान, शिपमेंट एजेंसियां और सरकारी विभाग एक ही मंच पर एकत्र होंगे।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन भारत की टिकाऊ और विश्वसनीय खाद्य निर्यात नीति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर देगा तथा प्रमुख आयातक देशों के साथ सहयोग को और मजबूत करेगा। जैन ने यह भी कहा कि भारत अब कृषि व्यापार में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है और विश्व खाद्य सुरक्षा में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर रहा है।


