गुजरात (Gujarat) में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (CM Bhupendra Patel) के नेतृत्व में नया मंत्रिपरिषद (Cabinet) का शपथ ग्रहण समारोह आज संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल (Governor) आचार्य देवव्रत (Acharya Devvrat) ने 25 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद राज्य के कुल 26 मंत्री मंत्रिपरिषद में शामिल हो गए हैं, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल हैं।
इस नई मंत्रिपरिषद में तीन बार के विधायक एवं मजूरा सीट से चुने गए हर्ष सांघवी को गुजरात का नया उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) नियुक्त किया गया है। श्री सांघवी इससे पूर्व गृह राज्यमंत्री थे और समाज में जैन समुदाय के युवा चेहरे के तौर पर उनकी छवि स्थापित रही है। वे लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं।
पिछले साल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विसनगर विधायक अर्जुन मोढवाडिया को भी मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, रुशीकेश पटेल, प्रफुल पानशेरिया और कुंवरजी बावलिया को फिर से मंत्री बनाया गया है। प्रफुल पानशेरिया सूरत की कामरेज सीट से तीसरी बार विधायक हैं और 2022 से शिक्षा राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उन्हें अब कैबिनेट मंत्री का पद प्रदान किया गया है।
नए मंत्रिपरिषद में सामाजिक प्रतिनिधित्व को संतुलित रखने का विशेष ध्यान रखा गया है। पाटीदार समुदाय से 6 मंत्रियों को स्थान मिला है, जिनमें कौशिक वेकरिया, प्रफुल पानशेरिया, कांती अमृतिया, ऋषिकेश पटेल, जीतूभाई वाघाणी और कमलेश पटेल शामिल हैं। अनुसूचित जाति से मनीषा वकील, प्रद्युम्न वाजा और दर्शन वाघेला मंत्री बने हैं। आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व रमेश कटारा, पी.सी. बरंडा, जयराम गामित और नरेश पटेल कर रहे हैं।
क्षत्रिय समाज से रिवाबा जाडेजा और संजयसिंह महिडा को मंत्री बनाया गया है। ओबीसी समुदाय का प्रतिनिधित्व आठ मंत्रियों द्वारा किया जा रहा है, जिनमें कुंवरजी बावलिया, अर्जुन मोढवाडिया, परसोत्तम सोलंकी, त्रिकम छांगा, प्रवीण माली, स्वरूपजी ठाकोर, ईश्वरसिंह पटेल और रमन सोलंकी शामिल हैं। ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व कनुभाई देसाई कर रहे हैं।
क्षेत्रीय आधार पर मंत्रियों के प्रतिनिधित्व की बात करें तो सौराष्ट्र-कच्छ से 9, मध्य गुजरात से 6, दक्षिण गुजरात से 5 और उत्तर गुजरात से 4 मंत्री। अहमदाबाद से दर्शन वाघेला मंत्री बने हैं।
गुजरात सरकार के इस नए मंत्रिपरिषद का गठन भाजपा के मिशन 2027 के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी आगामी निकाय चुनाव में नए सामाजिक समीकरणों का परीक्षण करने की तैयारी कर रही है। युवा विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने से युवा नेताओं का हौसला बढ़ा है और ओबीसी-पाटीदार प्रतिनिधित्व मजबूत हुआ है। इसका आगामी चुनावों में भाजपा को लाभ मिलने की संभावना है।


