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सहकारी बैंकों को आधार-सक्षम सेवाओं से जोड़ने पर कार्यशाला, सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी शामिल

इस अवसर पर UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री भुवनेश कुमार, नाबार्ड के अध्यक्ष श्री शाजी के. वी., तथा सहकारिता मंत्रालय, UIDAI, NPCI और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Published: 10:03am, 20 Sep 2025

सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में सहकारी बैंकों को आधार-सक्षम भुगतान सेवाओं से जोड़ने हेतु UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के संशोधित ढांचे पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री भुवनेश कुमार, नाबार्ड के अध्यक्ष श्री शाजी के. वी., तथा सहकारिता मंत्रालय, UIDAI, NPCI और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। देशभर के 34 राज्य सहकारी बैंक (StCBs) और 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs) के प्रतिनिधियों सहित 500 से अधिक प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला में भाग लिया।

डॉ. भूटानी ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। इस पहल से सहकारी बैंक आधार-सक्षम डिजिटल सेवाओं को अपनाकर अधिक सशक्त और आधुनिक बनेंगे, साथ ही ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को गति मिलेगी।

UIDAI के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने बताया कि संशोधित ढांचा सहकारी बैंकों को आधार प्रमाणीकरण और e-KYC सेवाएं अपनाने में अत्यधिक सहूलियत प्रदान करेगा। वहीं, नाबार्ड के अध्यक्ष श्री शाजी के. वी. ने आश्वस्त किया कि नाबार्ड इस व्यवस्था को लागू करने में पूर्ण सहयोग देगा, जिससे सहकारी बैंक अपने सदस्यों तक बेहतर सेवाएं पहुंचा सकेंगे।

अब तक तकनीकी आवश्यकताओं और अधिक लागत के कारण सहकारी बैंक आधार प्रमाणीकरण प्रणाली से वंचित थे। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए UIDAI ने सहकारिता मंत्रालय, नाबार्ड, NPCI और सहकारी बैंकों से परामर्श के बाद एक सरल ढांचा तैयार किया है।

इस संशोधित प्रणाली के तहत केवल राज्य सहकारी बैंक को UIDAI में Authentication User Agencies (AUAs) और e-KYC User Agencies (KUAs) के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जिला केंद्रीय सहकारी बैंक उन्हीं राज्य सहकारी बैंकों की आईटी अवसंरचना और प्रमाणीकरण सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस व्यवस्था से DCCBs को अलग से आईटी प्रणाली विकसित करने और उसके रखरखाव की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया अधिक किफायती और सुव्यवस्थित हो जाएगी।

Diksha