भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि यदि सहकारी बैंक व्यावसायिक बैंकों की तर्ज पर सुविधाएं चाहते हैं, तो उन्हें अपने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) में कमी करनी होगी और कामकाज के स्तर पर भी खुद को व्यावसायिक बैंकों के बराबर लाना होगा।
शनिवार को शिमला के पीटरहाफ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों को बेहतर कामकाज के लिए 3.75 प्रतिशत शेयर रिजर्व बैंक के पास जमा करवाना होगा। इससे उन्हें अधिक शाखाएं खोलने, उपभोक्ताओं को ज्यादा ऋण उपलब्ध कराने और अन्य बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने का अवसर मिलेगा।
इससे पहले हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि भारत में सहकारिता की शुरुआत वर्ष 1892 में हिमाचल के पंजावर में सहकारिता समिति गठित करने से हुई थी, जिसका पंजीकरण 1906 में किया गया। आज सहकारी समितियां पूरे देश में सक्रिय हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सहकारिता के जनक मियां हीरा सिंह के योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके नाम पर सहकारिता से संबंधित संस्थान स्थापित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना का भी स्वागत किया।


