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GST सुधारों से सहकारिता क्षेत्र होगा लाभान्वित, डेयरी सेक्टर में भी आएगा बड़ा बूम

केंद्र सरकार ने जीएसटी में ऐतिहासिक कटौती की घोषणा की है, जिससे सहकारी संस्थाओं, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा। दूध, मक्खन, घी, पनीर समेत कई दुग्ध एवं खाद्य उत्पाद अब सस्ते होंगे। ट्रैक्टर, खाद-बीज और कृषि उपकरणों पर टैक्स कम कर दिया गया है, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी। यह सुधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता, सहकारिता और प्राकृतिक खेती को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।

Published: 13:24pm, 08 Sep 2025

केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वस्तु एवं सेवा कर (GST) में व्यापक कमी की घोषणा की है। इस कदम से देशभर के 10 करोड़ से अधिक डेयरी किसानों, सहकारी संस्थाओं, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण उद्यमों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए #NextGenGST सुधारों से सहकारी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध होंगी।

दुग्ध सहकारिता क्षेत्र को विशेष लाभ देते हुए दूध और पनीर को, चाहे वे ब्रांडेड हों या बिना ब्रांड के, पूरी तरह से जीएसटी मुक्त कर दिया गया है। मक्खन और घी जैसे उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। दूध के कनस्तरों पर भी जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इन उपायों से महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमशीलता और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को सस्ते दरों पर प्रोटीन और वसा का स्रोत उपलब्ध होगा।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी व्यापक राहत दी गई है। चीज़, नमकीन, मक्खन और पास्ता पर जीएसटी 12% या 18% से घटाकर 5% किया गया है। इसी तरह जैम, जेली, खमीर, भुजिया और फलों के गूदे पर आधारित पेय अब मात्र 5% जीएसटी पर उपलब्ध होंगे। चॉकलेट, कॉर्न फ्लेक्स, आइसक्रीम, पेस्ट्री, केक, बिस्किट और कॉफी पर भी जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे घरेलू खर्च कम होगा, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में माँग बढ़ेगी और सहकारी एवं निजी प्रसंस्करण इकाइयों की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पैकेजिंग पेपर, डिब्बे और पेटियों पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग की लागत कम होगी।

कृषि यंत्र क्षेत्र में भी किसानों को बड़ी राहत दी गई है। 1800 सीसी से कम क्षमता वाले ट्रैक्टरों पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है। ट्रैक्टर के टायर, ट्यूब, हाइड्रोलिक पंप और अन्य पुर्जों पर भी जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में किसानों की लागत घटेगी।

उर्वरक क्षेत्र में अमोनिया, सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल जैसे प्रमुख कच्चे माल पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे उर्वरक कंपनियों की इनपुट लागत घटेगी और किसानों को किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध होंगे। बायो-पेस्टीसाइड और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। यह कदम जैविक खेती को प्रोत्साहन देगा और छोटे किसानों व एफपीओ को सीधा लाभ पहुंचाएगा।

वाणिज्यिक वाहनों में भी राहत दी गई है। ट्रक और डिलीवरी वैन पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, कृषि उत्पादों का परिवहन सस्ता होगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बल मिलेगा। साथ ही थर्ड-पार्टी बीमा पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा भी दी गई है।

कुल मिलाकर, इन जीएसटी सुधारों से सहकारी क्षेत्र को मजबूती, किसानों को राहत, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा और उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर आवश्यक वस्तुएं मिलेंगी। सरकार का यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-आधारित उद्योगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

YuvaSahakar Desk

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