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बिहार में डेयरी क्षेत्र होगा सशक्त, नए डेयरी और दूध पाउडर संयंत्र होंगे स्थावित

बिहार सरकार ने राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और दूध की सहज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए डेयरी और दूध पाउडर संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। गोपालगंज, गया, दरभंगा, सीतामढ़ी और रोहतास में बड़े प्लांट स्थापित होंगे। कुल 316.31 करोड़ रुपये की लागत से ये योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र के किसानों और डेयरी उद्योग के लिए आर्थिक समृद्धि लाएंगी।

Published: 16:22pm, 28 Aug 2025

बिहार सरकार ने राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की घोषणा की है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, राज्य के पांच जिलों में नए डेयरी और दूध पाउडर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

डेयरी संयंत्रों की स्थापना

सरकार ने दरभंगा, गया जिले के वजीरगंज और गोपालगंज में बड़े डेयरी प्लांट लगाने का निर्णय लिया है।

  • दरभंगा में दो लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला डेयरी संयंत्र लगाया जाएगा, जिस पर 71 करोड़ 32 लाख रुपये खर्च होंगे।
  • गया के वजीरगंज में भी दो लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र स्थापित होगा, जिसकी लागत 50 करोड़ 27 लाख रुपये होगी।
  • गोपालगंज में एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का डेयरी संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिस पर 54 करोड़ 73 लाख रुपये खर्च होंगे।

इन तीनों संयंत्रों के शुरू होने के बाद दूध का संग्रहण, शीतलीकरण और वितरण की मजबूत व्यवस्था बनेगी। इससे न केवल इन जिलों में बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी दूध की नियमित आपूर्ति संभव हो सकेगी।

दूध पाउडर संयंत्र: अतिरिक्त उत्पादन का समाधान

बिहार सरकार ने अतिरिक्त दूध उत्पादन के बेहतर प्रबंधन के लिए दूध पाउडर संयंत्र स्थापित करने की भी योजना बनाई है।

  • सीतामढ़ी में 30 टन क्षमता का दूध चूर्ण संयंत्र बनेगा, जिस पर 70 करोड़ 33 लाख रुपये की लागत आएगी।

  • रोहतास जिले के डेहरी ऑनसोन में भी 30 टन क्षमता का दूध पाउडर संयंत्र लगाया जाएगा, जिस पर 69 करोड़ 66 लाख रुपये खर्च होंगे।

इन संयंत्रों की स्थापना से अतिरिक्त दूध को पाउडर के रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा और बर्बादी से बचाव होगा।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

इन योजनाओं का सबसे बड़ा लाभ किसानों को होगा। अब तक अधिक उत्पादन होने पर दूध की बिक्री में दिक्कत होती थी, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। दूध पाउडर संयंत्र लगने से यह समस्या दूर होगी। साथ ही डेयरी संयंत्रों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

दूध संग्रहण, परिवहन, प्रोसेसिंग और वितरण से जुड़े हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

बिहार का डेयरी उद्योग: आत्मनिर्भरता की ओर

बिहार लंबे समय से देश के अग्रणी दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। लेकिन कई बार आधारभूत संरचना की कमी के कारण दूध की बर्बादी हो जाती थी। नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार डेयरी उद्योग में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाएगा।

इसके साथ ही, राज्य में डेयरी उद्योग को औद्योगिक पहचान मिलेगी और बिहार दूध उत्पादन व प्रोसेसिंग का एक प्रमुख हब बनकर उभरेगा।

आर्थिक दृष्टिकोण से बड़ा निवेश

इन परियोजनाओं पर 3 अरब 16 करोड़ 31 लाख रुपये की लागत आएगी। यह सिर्फ डेयरी क्षेत्र में निवेश नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने का प्रयास है। इन संयंत्रों के स्थापित होने से स्थानीय उपभोक्ताओं को ताज़ा दूध उपलब्ध होगा और शहरी क्षेत्रों में भी दूध की बढ़ती मांग पूरी की जा सकेगी।

YuvaSahakar Desk

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