सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ी से अपनी जगह बनाने के बाद अब भारत पवन ऊर्जा सेक्टर में भी मजबूत पहचान बना रहा है। भारत न केवल पवन ऊर्जा उत्पादन में अग्रसर है, बल्कि इससे जुड़े उपकरणों के निर्माण में भी अपनी क्षमता साबित कर रहा है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ‘ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल’ (GWEC) की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2030 तक वैश्विक पवन ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी कर लेगा। इसके लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि भारत में पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए 6,835 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुल 154 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने का है। मंत्रालय के सचिव संजय कुमार सरंगी ने कहा कि वर्ष 2070 तक ‘नेट-ज़ीरो लक्ष्य’ को हासिल करने में पवन ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम होगी।
GWEC की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य को पूरा करने के लिए कम से कम 5 लाख मेगावॉट बिजली पवन ऊर्जा से पैदा करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, आठ लाख मेगावॉट तक पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने से देश में लगभग 1.6 करोड़ रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
सौर ऊर्जा जब उत्पादन नहीं कर पाती, उस समय पवन ऊर्जा की उपलब्धता देश को 24 घंटे सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी।


