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डेयरी सेक्टर बना फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तेज गति से बढ़ रहा है, जिसमें डेयरी उद्योग 25% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख योगदान दे रहा है। NDDB का कहना है कि यह सेक्टर 2030 तक दोगुना होगा, जबकि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत 75,000 नई दुग्ध समितियां बनने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।

Published: 10:06am, 27 Aug 2025

भारत का फूड प्रोसेसिंग (Food Processing) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था (Indian GDP) में तेजी से उभरता हुआ उद्योग बन गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के कार्यकारी निदेशक सीतारामन रघुपति ने जानकारी दी कि भारत के फूड एंड बेवरेज सेक्टर में डेयरी उद्योग (Dairy Sector) का योगदान 25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में और अधिक तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है।

फूड और सामग्री प्रसंस्करण उद्योग इस समय 8.8 प्रतिशत की CAGR दर से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच भारत का फूडटेक उद्योग 14 प्रतिशत CAGR की दर से वैश्विक औसत से भी तेज गति पकड़ रहा है। अनुमान है कि भारत का फूड प्रोसेसिंग इंस्ट्रूमेंट मार्केट वर्ष 2033 तक 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक जाएगा, वहीं पैकेजिंग मशीनरी बिजनेस 2030 तक 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा।

अनुगा फूडटेक इंडिया और अनुगा सेलेक्ट इंडिया 2025 के अवसर पर आयोजित समारोह में सऊदी अरब के शाही दूतावास के प्रभारी अहमद अल अहमरी समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान NDDB के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भारत का खाद्य एवं पेय क्षेत्र लगातार तेजी से प्रगति कर रहा है। देश के पास 180 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि, 75 लाख करोड़ रुपये का खाद्य प्रसंस्करण कारोबार और उपभोक्ता खर्च के 40 प्रतिशत से अधिक का फूड कॉस्ट है, जो इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है।

भारत का डेयरी सेक्टर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है। सीतारामन रघुपति ने बताया कि भारत दुनिया में एक-चौथाई दूध का उत्पादन करता है, जिसकी बाजार में कीमत 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस उद्योग से जुड़े 2.35 लाख गांवों के 1.7 करोड़ किसान प्रत्यक्ष रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनमें से 35 प्रतिशत महिलाएं हैं।

उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारी समितियां उपभोक्ता द्वारा खर्च किए गए हर रुपये का लगभग 75 प्रतिशत किसानों तक पहुँचाती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन लगभग 200 करोड़ रुपये का योगदान मिलता है। इस मॉडल ने ग्रामीण भारत की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नई ऊर्जा दी है।

रघुपति ने यह भी बताया कि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत वर्ष 2028-29 तक 75,000 नई दुग्ध सहकारी समितियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम डेयरी सेक्टर को और मजबूत करेगा तथा ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में सहायक होगा।

YuvaSahakar Desk