नाबार्ड ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में बताया है कि भारत के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024 में स्थिर और मजबूत वृद्धि दर्ज की है। राज्य सहकारी बैंक (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs) दोनों ने वित्तीय मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, लघु अवधि सहकारी ऋण संरचना (STCCS) में वर्तमान में 34 राज्य सहकारी बैंक, 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और करीब 1.06 लाख प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) शामिल हैं, जो सामूहिक रूप से लगभग 6.5 लाख गाँवों तक ग्रामीण ऋण पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।
वित्तीय उपलब्धियाँ:
- राज्य सहकारी बैंकों की अंश पूँजी में 7.7% की वृद्धि होकर यह 10,531 करोड़ रुपये हो गई।
- जिला सहकारी बैंकों की अंश पूँजी 8.2% बढ़कर 28,661 करोड़ रुपये पर पहुँची।
- जमा राशि में भी वृद्धि हुई, जहाँ StCBs ने 2.56 लाख करोड़ रुपये (6% वृद्धि) जुटाए, वहीं DCCBs ने 4.76 लाख करोड़ रुपये (10% वृद्धि) की उपलब्धि हासिल की।
- उधारी और निवेश दोनों में इजाफा हुआ। StCBs की उधारी 1.73 लाख करोड़ रुपये (11.7% वृद्धि) और DCCBs की 1.61 लाख करोड़ रुपये (9.9% वृद्धि) रही।
ऋण और लाभप्रदता:
- StCBs के ऋण शेष में 10.9% वृद्धि होकर यह 2.94 लाख करोड़ रुपये पहुँचा, जबकि DCCBs में 11.4% वृद्धि के साथ यह 4.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
- 34 में से 32 StCBs ने लाभ अर्जित किया, जिनका कुल लाभ 2,691 करोड़ रुपये (9.5% वृद्धि) रहा।
- DCCBs में लाभ कमाने वाले बैंकों की संख्या 305 से बढ़कर 312 हो गई और शुद्ध लाभ 14.5% बढ़कर 3,297 करोड़ रुपये रहा।
संपत्ति गुणवत्ता:
- सकल एनपीए (NPA) घटकर StCBs में 4.9% और DCCBs में 8.9% पर आ गया।
- प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR) StCBs में 68.5% और DCCBs में 83.9% तक सुधरा।
- संरचनात्मक रूप से, 12 राज्य तीन-स्तरीय प्रणाली, 15 राज्य दो-स्तरीय प्रणाली और 7 राज्य मिश्रित मॉडल पर कार्यरत हैं।
दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना (LTCCS) के अंतर्गत 13 राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (SCARDBs) और 608 प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (PCARDBs) कार्यरत हैं। इसके अलावा 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) भी देशभर में ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाँ DCCBs आकार और पहुँच के लिहाज से बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं StCBs ने उधारी और ऋण वितरण में अधिक तेजी से वृद्धि दर्ज की है, जो उन्हें भारत की वित्तीय व्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है।


