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सहकारिता क्षेत्र में सरकार की बड़ी पहल : 2021 से अब तक बने 7,768 नए पैक्स, लेकिन राज्यों में दिखा असमान विस्तार

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के अनुसार, राजस्थान 1,968 नई PACS के साथ शीर्ष पर है, जो कुल राष्ट्रीय आँकड़े का एक चौथाई से अधिक है। ओडिशा 1,540 नई समितियों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि गुजरात ने 641, उत्तर प्रदेश ने 552 और उत्तराखंड ने 550 नई PACS स्थापित की हैं। ये पाँच राज्य मिलकर कुल नए PACS का दो-तिहाई हिस्सा बनाते हैं।

Published: 15:40pm, 26 Aug 2025

सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत जनवरी 2021 से अब तक देशभर में 7,768 नए प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियाँ (PACS) जोड़ी गई हैं। हालांकि, राज्यवार आँकड़े क्षेत्रीय असमानता को साफ दर्शाते हैं। जहाँ राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों ने तेजी से विस्तार किया है, वहीं केरल, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों में बेहद धीमी प्रगति दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के अनुसार, राजस्थान 1,968 नई PACS के साथ शीर्ष पर है, जो कुल राष्ट्रीय आँकड़े का एक चौथाई से अधिक है। ओडिशा 1,540 नई समितियों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि गुजरात ने 641, उत्तर प्रदेश ने 552 और उत्तराखंड ने 550 नई PACS स्थापित की हैं। ये पाँच राज्य मिलकर कुल नए PACS का दो-तिहाई हिस्सा बनाते हैं।

इसके विपरीत, परंपरागत रूप से सहकारिता क्षेत्र में मजबूत माने जाने वाले केरल ने सिर्फ 3, पंजाब और तेलंगाना ने 9-9 तथा तमिलनाडु ने 38 नई PACS बनाई हैं। केंद्र शासित प्रदेशों जैसे चंडीगढ़, लक्षद्वीप और दिल्ली में कोई भी नई समिति नहीं जुड़ी। यह असमान गति सरकार की “सर्वव्यापी सहकारिता कवरेज” योजना में क्षेत्रीय अंतर को उजागर करती है।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी मिश्रित नतीजे सामने आए हैं। मेघालय (276), असम (254), त्रिपुरा (202) और अरुणाचल प्रदेश (127) ने उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है, जबकि नगालैंड (67), मिजोरम (47) और मणिपुर (72) का प्रदर्शन मध्यम रहा। जम्मू-कश्मीर ने भी 166 नई PACS जोड़ी हैं।

मध्य भारत में भी विविध परिणाम देखने को मिले। मध्य प्रदेश ने 250, छत्तीसगढ़ ने सिर्फ 8 और झारखंड ने 68 नई समितियाँ स्थापित कीं। महाराष्ट्र ने 234, हरियाणा ने 46, गोवा ने 26 और सिक्किम ने 25 PACS जोड़ी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि विस्तार की रफ़्तार उन राज्यों में सबसे तेज रही है जहाँ ग्रामीण आजीविका के लिए सहकारी ढाँचे की सीधी जरूरत है। वहीं, औद्योगिक या पहले से सघन सहकारिता बाजार वाले राज्यों में नई समितियों की स्थापना की गति धीमी रही।

वर्तमान में 93% ग्राम पंचायतों में PACS की पहुँच हो चुकी है। अब सरकार का ध्यान डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों पर है, जहाँ कवरेज अभी पीछे है। हालांकि PACS के आँकड़े साफ बताते हैं कि जहाँ राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़े हैं, वहीं कुछ राज्य सरकार की जमीनी सहकारिता दृष्टि को पूरा करने में पिछड़ रहे हैं।

 

Diksha

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