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SPICED योजना से हल्दी निर्यात को नई गति, 50% से अधिक का उछाल

भारत की हल्दी का वैश्विक बाजार में दबदबा उसकी गुणवत्ता, औषधीय महत्व और सरकार की रणनीतिक पहलों का परिणाम है। SPICED योजना और राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के समन्वित प्रयासों से भारत न केवल अपनी पारंपरिक विरासत को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर “हल्दी की राजधानी” के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है।

Published: 14:24pm, 13 Aug 2025

भारत की हल्दी ने एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के हल्दी निर्यात में 50.7 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस वर्ष हल्दी का निर्यात 341.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 226.58 मिलियन डॉलर की तुलना में काफी अधिक है। मात्रा के लिहाज से भी निर्यात में वृद्धि देखी गई है, जो 1.62 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 1.76 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि भारत वर्तमान में वैश्विक हल्दी बाजार में 66 फीसदी हिस्सेदारी रखता है, जो इस क्षेत्र में अग्रणी है।

SPICED योजना: हल्दी निर्यात को नई ऊंचाइयां

भारत सरकार ने हल्दी और अन्य मसालों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए “Sustainability in Spice Sector through Progressive, Innovative and Collaborative Interventions for Export Development (SPICED)” योजना लागू की है। इस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता प्रमाणन, फसल कटाई के बाद गुणवत्ता उन्नयन, प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हल्दी किसानों और उद्यमियों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। SPICED योजना के अंतर्गत आयोजित खरीदार-विक्रेता बैठकें (Buyer-Seller Meets) भारतीय किसानों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे बाजार संपर्क मजबूत हो रहा है।

राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड: वैश्विक बाजार में भारत की पहचान

4 अक्टूबर, 2023 को गठित राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड ने हल्दी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह बोर्ड नए उत्पादों के विकास, मूल्य संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हल्दी की मांग बढ़ाने पर केंद्रित है। बोर्ड का लक्ष्य मजबूत और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है, जिसमें बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में सुधार शामिल है। इसके अतिरिक्त, हल्दी के औषधीय और स्वास्थ्यवर्धक गुणों पर शोध को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को दस्तावेजीकृत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्रमुख निर्यातक देश और भविष्य की संभावनाएं

वर्ष 2020 से बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए), मलेशिया और मोरक्को भारतीय हल्दी के शीर्ष पांच आयातक देश रहे हैं। वैश्विक स्तर पर हल्दी आधारित खाद्य और स्वास्थ्य उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए, भारत की SPICED योजना और राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की पहलें देश की बाजार हिस्सेदारी को और बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि  हल्दी निर्यात में यह उछाल न केवल भारतीय किसानों की आय में वृद्धि का संकेत है, बल्कि भारत को वैश्विक मसाला व्यापार में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। सरकार की इन पहलों से न केवल निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड ने वर्ष 2030 तक हल्दी निर्यात को 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

YuvaSahakar Desk

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