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किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना- अमित शाह

दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना और एनसीडीसी की अन्य योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण ऋण संस्थानों को विकासपरक परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, किसानों की आय में वृद्धि और सहकारी आंदोलन को मजबूती दी जा रही है। कठोर मूल्यांकन, सख्त निगरानी और प्रभावी वसूली तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर निवेशित रुपया कृषि क्षेत्र की उत्पादकता और मजबूती में सार्थक योगदान दे।

Published: 12:49pm, 13 Aug 2025

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने स्पष्ट किया कि सरकार (Government Of India) कृषि सहकारिताओं (Cooperatives) को दीर्घकालिक और सतत विकास के लिए आवश्यक वित्तीय मजबूती प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि “दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना” ग्रामीण ऋण संस्थानों को विकासोन्मुख परियोजनाओं के वित्तपोषण, किसानों की आय में वृद्धि और भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में सहकारी आंदोलन की भूमिका को सुदृढ़ बनाने का एक प्रमुख माध्यम है।

सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) इस योजना के तहत कृषि ऋण सहकारिताओं को मजबूत करने के प्रयासों को और गति दे रहा है। योजना के अंतर्गत सहकारिताओं को एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र में आने वाली गतिविधियों, वस्तुओं और सेवाओं के लिए दीर्घकालिक ऋण और अग्रिम प्रदान किए जाते हैं।

एनसीडीसी यह सुनिश्चित करने के लिए कठोर वित्तपोषण दिशानिर्देशों का पालन करता है कि केवल विश्वसनीय और वित्तीय रूप से सक्षम परियोजनाओं को ही सहायता दी जाए। परियोजनाओं को पर्याप्त सुरक्षा के साथ प्रस्तुत करना आवश्यक है और उन्हें वित्तीय व्यवहार्यता एवं तकनीकी उपयुक्तता के कठोर मूल्यांकन से गुजरना होता है।

प्रत्यक्ष वित्तपोषण दिशानिर्देशों के तहत, एनसीडीसी परियोजनाओं का मूल्यांकन कई मानकों जैसे आंतरिक प्रतिफल दर (IRR), शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV), ऋण सेवा कवरेज अनुपात (DSCR), ब्याज कवरेज अनुपात, स्थायी परिसंपत्ति कवरेज अनुपात (FACR) और अनुमानित नकदी प्रवाह के आधार पर करता है। इसके अलावा, सहकारी संस्था की वित्तीय स्थिति, पूर्व प्रदर्शन, प्रबंधकीय क्षमता, समान परियोजनाओं में अनुभव, पुनर्भुगतान रिकॉर्ड, परियोजना लागत में अपनी हिस्सेदारी जुटाने की क्षमता और प्रस्तुत सुरक्षा की पर्याप्तता का भी आकलन किया जाता है।

यह बहु-स्तरीय जांच सुनिश्चित करती है कि केवल तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से मजबूत परियोजनाओं को ही वित्तपोषण मिले, जो एनसीडीसी के सहकारी क्षेत्र के समेकित विकास के मिशन के अनुरूप है।

जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, एनसीडीसी अपने मुख्यालय, 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और 9 उप-कार्यालयों के माध्यम से सुदृढ़ निगरानी ढांचा अपनाता है। परियोजनाओं की समय-समय पर या आवश्यकता के अनुसार निगरानी की जाती है, जिसमें सामान्यत: प्रत्येक तिमाही में क्षेत्रीय निरीक्षण शामिल हैं। लाभार्थी सहकारिताओं के लिए नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निधियों का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो रहा है।

ऋण वसूली के लिए एनसीडीसी के पास एक समर्पित विभाग है, जिसमें स्पष्ट प्रक्रियाएं तय हैं। पुनर्भुगतान अनुसूचियों के अनुसार अग्रिम नोटिस जारी किए जाते हैं और समय पर अनुस्मारक भेजे जाते हैं। डिफॉल्ट की स्थिति में, एनसीडीसी सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) के प्रावधान लागू करता है और आवश्यकता पड़ने पर ऋण वसूली अधिकरण (DRT) में मामले दर्ज करता है।

हाल के वर्षों में इस योजना के तहत वित्तीय वितरण में बदलाव देखा गया है। वर्ष 2022–23 में 400 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई, लेकिन कोई राशि जारी नहीं हुई। वर्ष 2023–24 में नई स्वीकृति नहीं दी गई, परंतु पूर्व स्वीकृतियों से 60 करोड़ रुपये वितरित किए गए। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024–25 में, एनसीडीसी ने अभूतपूर्व 5,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिसमें से अब तक 2,077 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। तीन वर्षों में कुल स्वीकृति राशि 5,400 करोड़ रुपये और कुल वितरण 2,137 करोड़ रुपये तक पहुंचा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कठोर परियोजना मूल्यांकन, सतत निगरानी और मजबूत वसूली तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर निवेशित रुपया कृषि क्षेत्र की उत्पादकता और मजबूती में योगदान दे।

एनसीडीसी कृषि सहकारिताओं को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं लागू करता है, जिनमें शामिल हैं—

  1. युवा सहकार – नवगठित सहकारी समितियों को नए और नवाचारी विचारों से प्रोत्साहित करने हेतु।

  2. आयुष्मान सहकार – अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, पैरामेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा और आयुष प्रणाली को कवर करने वाली योजना।

  3. नंदिनी सहकार – महिला सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक स्थिति में सुधार और उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु।

  4. डेयरी सहकार – डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता और ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक, शासन) गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए।

  5. स्वयं शक्ति सहकार योजना – महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण/अग्रिम उपलब्ध कराने हेतु।

  6. दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना – एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र में आने वाली गतिविधियों, वस्तुओं और सेवाओं के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु।

  7. पूर्ववर्ती केंद्रीय क्षेत्र योजना – सहकारी चीनी मिलों (CSM) का सशक्तिकरण

  8. पूर्ववर्ती केंद्रीय क्षेत्र एकीकृत योजना (CSISAC) – सहकारिता विकास कार्यक्रमों को सहायता देने हेतु।

इसके अतिरिक्त, एनसीडीसी कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी, पशुधन, खाद्य प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और कोल्ड चेन जैसे क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की अन्य केंद्रीय क्षेत्र/प्रायोजित योजनाओं को भी लागू करता है।

YuvaSahakar Desk

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