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आंध्र प्रदेश के 350 तटीय गांवों में नियुक्त होंगे सागर मित्र, मछुआरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में करेंगे मदद

सरकार का मानना है कि सागर मित्रों की नियुक्ति और बीमा योजनाओं से मछुआरों की आजीविका और सुरक्षा, दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा। ये सागर मित्र मछुआरों को मत्स्य संबंधी सलाह, योजनाओं की जानकारी और डिजिटल सेवाओं का लाभ दिलाने में मदद करेंगे।

Published: 13:04pm, 10 Aug 2025

भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत राज्य के 350 तटीय गांवों में ‘सागर मित्र’ नियुक्त किए जाएंगे।

मछुआरों को सलाह और तकनीकी मदद

राज्य के मत्स्यपालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा में बताया कि इन 350 सागर मित्रों में से 317 वर्तमान में कार्यरत हैं। ये मछुआरों को मत्स्य संबंधी सलाह, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ डिजिटल एप्लिकेशन के उपयोग में मदद करते हैं।

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) द्वारा प्रदान की जाने वाली पोटेंशियल फिशिंग ज़ोन्स (PFZ) की जानकारी मछुआरों को वॉयस मैसेज, IVRS और NABHMITRA मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। यह तकनीकी सहायता राज्य के 1.23 लाख से अधिक मछुआरों तक पहुंच चुकी है।

बीमा और वित्तीय सुरक्षा

PMMSY के अंतर्गत मछुआरों के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना (GAIS) लागू है। वर्ष 2025-26 में 2,58,515 मछुआरे इस योजना के दायरे में हैं। बीमा प्रीमियम की 2.07 करोड़ रुपये से अधिक राशि केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से वहन करती हैं। योजना के तहत —

  • मृत्यु या स्थायी अक्षमता: ₹5 लाख

  • आंशिक अक्षमता: ₹2.5 लाख

  • इसके अलावा, राज्य सरकार मत्स्यन के दौरान मृत्यु होने पर मृतक मछुआरों के परिजनों को ₹10 लाख अनुग्रह राशि प्रदान करती है।

YuvaSahakar Desk

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