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बिहार में ड्रैगन फ्रूट खेती को बढ़ावा, दो किस्तों में मिलेगा बंपर अनुदान

योजना के तहत किसानों को न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर से अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की खेती के लिए अनुदान मिलेगा। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के दिशा-निर्देशों के अनुसार 20x20 मीटर की दूरी पर प्रति हेक्टेयर 5000 पौधे लगाए जाएंगे।

Published: 14:56pm, 09 Aug 2025

कृषि प्रधान बिहार में समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक फसलों के साथ अब राज्य के किसान विदेशी नकदी फसलों और उद्यानिकी की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। हाल के वर्षों में ड्रैगन फ्रूट की खेती राज्य में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी को प्रोत्साहन देने के लिए बिहार सरकार ने “ड्रैगन फ्रूट विकास योजना” की शुरुआत की है।

उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक ड्रैगन फ्रूट की खेती के विस्तार और प्रोत्साहन के लिए 1 करोड़ 26 लाख 90 हजार रुपये की स्वीकृति दी है। इस राशि में से वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 76.14 लाख रुपये की निर्गत कर खर्च की अनुमति दी गई है। योजना वर्तमान में राज्य के 23 जिलों में लागू की गई है और इसका विशेष ध्यान लघु एवं सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने पर है।

किसानों को मिलेगा अनुदान

कृषि मंत्री ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत किसानों को न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 2.0 हेक्टेयर तक की खेती के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रति हेक्टेयर 5000 पौधों की रोपाई 20×20 मीटर की दूरी पर की जाएगी।

कुल इकाई लागत 6.75 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है, जिस पर 40 प्रतिशत यानी 2.70 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान दो किस्तों में वितरित होगा। पहली किस्त के रूप में 1.62 लाख रुपये और दूसरी किस्त के रूप में 1.08 लाख रुपये किसानों को प्रदान की जाएगी।

योजना के तहत किसानों का चयन ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। किसानों को अनुदान का लाभ उठाने के लिए horticulture.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो और बिहार देश में इस फल के प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल हो। कृषि विभाग को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह पहल बिहार की कृषि में एक नया आयाम जोड़ेगी।

YuvaSahakar Desk