अमेरिका की सख्त नीतियों और भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच अब भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी विदेश नीति को और भी मजबूत किया है। रूस और चीन के साथ भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज की है। पीएम नरेंद्र मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन के तिआनजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
गलवान घाटी मे हुई सैन्य झड़प के बाद पीएम का चीन का पहला दौरा
इस दौरे को कई मायनो में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद यह पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी। इससे पहले वे 2018 में चीन गए थे। बतौर प्रधानमंत्री यह उनका छठा चीन दौरा होगा, जो अब तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की सबसे ज्यादा चीन यात्राएं हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी पीएम की चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आखिरी मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच 50 मिनट की द्विपक्षीय बातचीत हुई थी, जिसमें मोदी ने कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता को भारत-चीन संबंधों की नींव बताया था।
रुसी राष्ट्रपति का भारत आगमन
इसी बीच रूस के साथ भी भारत के संबंध और प्रगाढ़ हो रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने जानकारी दी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत तक भारत दौरे पर आएंगे। डोभाल फिलहाल रूस में हैं और वहां S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी और तेल खरीद जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।


