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अब चीन से सोयाबीन तेल आयात करेंगी पतंजलि-अडानी समेत 8 भारतीय कंपनियां

यह कदम उस समय उठाया गया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। पारंपरिक रूप से, भारत सोयाबीन तेल का आयात अर्जेंटीना और ब्राजील से करता रहा है, जहां से यह तेल $15-20 प्रति टन सस्ता मिलता है। हालांकि, चीन से आयात की अवधि केवल कुछ हफ्तों की है, जबकि लैटिन अमेरिकी देशों से शिपमेंट में 45 दिन तक लगते हैं।

Published: 11:04am, 01 Aug 2025

वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक नई दिशा लेते हुए भारत की 8 प्रमुख कंपनियों ने चीन से 1.5 लाख टन सोयाबीन तेल के आयात के लिए समझौता किया है। यह समझौता सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच लागू होगा और इसमें देश की अग्रणी कंपनियां जैसे पतंजलि फूड्स, अडानी विल्मर, कारगिल, बंगे, एडीएम, लुईस ड्रेफस, इमामी एग्रो टेक, जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स, तथा गोकुल एग्रो रिसोर्सेज शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बना हुआ है। यह सोयाबीन तेल चीन की सरकारी कंपनी कोस्को और एक निजी निर्यातक के माध्यम से भारत पहुंचाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम तेल आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की दिशा में रणनीतिक रूप से अहम है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, मुंबई में डिगम्ड सोयाबीन तेल की लैंडेड कीमत $1,205 प्रति टन है, जबकि RBD पामोलीन $1,070 और सूरजमुखी तेल $1,230 प्रति टन पर उपलब्ध है।

SEA के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता ने बताया कि चीन ने वर्ष 2025 में अब तक 100 मिलियन टन सोयाबीन आयात किया है, जिससे वहां सोया तेल और सोया मील का अधिशेष बन गया है। यही कारण है कि चीन जैसे पारंपरिक आयातक देश को अब तेल निर्यात करना पड़ रहा है।

इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि यह ट्रेंड ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। भारत प्रतिवर्ष लगभग 3.5 से 4.1 मिलियन टन सोयाबीन तेल और 7-9 मिलियन टन पाम तेल का आयात करता है। वर्तमान में अर्जेंटीना भारत के कुल सोया तेल आयात का 65% हिस्सा प्रदान करता है, जबकि ब्राज़ील से 7-8 लाख टन और बाकी मात्रा रूस, यूक्रेन, तुर्की, ईरान और मिस्र जैसे देशों से आती है।

SEA के पूर्व अध्यक्ष और सनविन ग्रुप के सीईओ संदीप बजोरिया का मानना है कि यदि चीन से आने वाला तेल प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होता है, तो यह आयात पूरी तरह व्यावसायिक समझदारी पर आधारित है और भारत को तेल स्रोतों के विविधीकरण की दिशा में मदद करेगा।

तेल बीजों की बात करें तो इस समय बाजार में अधिकतर फसलों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहे हैं। उदाहरणस्वरूप मूंगफली ₹5,400 प्रति क्विंटल पर बिक रही है जबकि MSP ₹6,783 है। सोयाबीन का बाजार मूल्य ₹4,600 है, जबकि MSP ₹4,892 निर्धारित है। केवल सरसों और तिल MSP से ऊपर बिक रहे हैं।

त्योहारी सीजन की मांग को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि पाम और सोया तेल का यह आयात उपभोक्ता मांग को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे कीमतों में स्थिरता बनी रह सकेगी।

YuvaSahakar Desk