भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत अगले पांच वर्षों में भारतीय कृषि निर्यात में 50 प्रतिशत तक वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह वृद्धि ताजे फलों, सब्जियों, प्रोसेस्ड फूड्स और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में आई तेजी के कारण संभव होगी।
1.5 अरब डॉलर को छू सकता है कृषि निर्यात
भारत का कृषि निर्यात ब्रिटेन में 2030 तक बढ़कर 1 से 1.5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार ने किसानों को कीटनाशकों के सही इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है ताकि उत्पाद यूरोपीय मानकों पर खरे उतरें।
कई उत्पादों पर आयात शुल्क हुआ शून्य
समझौते के अंतर्गत ताजे अंगूर (8%), प्याज (4.5%), शहद (16%), केला (16%) जैसे उत्पादों पर ब्रिटेन ने आयात शुल्क शून्य कर दिया है। वहीं बिस्कुट, वेकरी उत्पाद जैसे खाद्य उत्पादों पर भी शुल्क में कटौती की गई है, जिससे भारत के लिए ब्रिटेन के बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान हो जाएगा।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस समझौते से महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों को सीधा व्यापारिक लाभ मिलेगा। सरकार एफपीओ के माध्यम से किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।
निर्यात में चुनौतियां भी मौजूद
हालांकि कृषि निर्यात में संभावनाएं तो हैं, लेकिन लॉजिस्टिक्स, भंडारण और निर्यात ढांचे की कमियों को दूर करना भी जरूरी है। फलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताज़ा रखने की व्यवस्था, उचित पैकेजिंग और यूरोपीय गुणवत्ता मानकों का पालन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे। दूसरी चुनौती यह है कि बिहार, उत्तर प्रदेश जैसी जगहों से कृषि उत्पाद के निर्यात की बड़ी संभावना है लेकिन इन जगहों से सीधे तौर पर निर्यात करनें की सुविधा नहीं है। वहां से पहले माल को मुबंई या कोलकाता भेजना पड़ता है, जिससे लागत अधिक हो जाती है।


