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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से संसद के पहले ही दिन दिया इस्तीफा

सूत्रो की माने तो धनखड़ पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। 9 मार्च 2025 को सीने में दर्द की शिकायत के चलते उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती किया गया था। जिसकी उन्होंने एंजियोप्लास्टी भी कराई थी। डॉक्टरों ने उन्हें लंबा आराम करने की सलाह दी, जिसके चलते उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया।

Published: 12:13pm, 22 Jul 2025

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति के पद को छोड़ने का फैसला लिया। यह घोषणा सोमवार देर रात राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर उपराष्ट्रपति  ने दी।

जगदीप धनखड़ ने 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में 11 अगस्त 2022 को शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक निर्धारित था। लेकिन महज दो साल के भीतर ही उन्होंने निजी कारणों के चलते पद से हटने का निर्णय लिया।

निजि कारणों की वजह से लिया कठिन निर्णय

सूत्रो की माने तो धनखड़ पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। 9 मार्च 2025 को सीने में दर्द की शिकायत के चलते उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती किया गया था। जिसकी उन्होंने एंजियोप्लास्टी भी कराई थी। डॉक्टरों ने उन्हें लंबा आराम करने की सलाह दी, जिसके चलते उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया।

धनखड़ का जन्म एंव शिक्षा संबंधी जानकारी

जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को झुंझुनूं राजस्थान के किथाना गाँव में हुआ था। वर्ष 1978-79 में  राजस्थान यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। 1989 में जनता दल के टिकट पर झुंझुनूं से संसद बने। इसके बाद धनखड़ केंद्रीय मंत्री भी रहे। 30 जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के 28वें राज्यपाल नियुक्त हुए। 2022 में एनडीए के उम्मीदवार के रूप में उपराष्ट्रपति बने।

अनुच्छेद 67 ए के तहत पद से इस्तीफा

राष्ट्रपति को त्याग पत्र लिखते हुए धनख़ड़ ने संविधान के अनुच्छेद 67 ए के तहत अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री व मंत्री परिषद के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हुए आभार भी प्रकट किया। यदि राष्ट्रपति उनका त्याग पत्र स्वीकार कर लेती है तो उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाएगा।

कार्यकाल के दौरान रहे विपक्ष के निशाने पर

धनखड़ अपने मुखर स्वभाव के चलते काफी चर्चा में बने रहते थे। विपक्षी दल ने तो उन्हे पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव तक पारित करने का निर्णय लिया था, जो कि बाद में खारिज हो गया था। वहीं विपक्ष अब उनके इस निर्णय पर चिंता जता रहा है।

 

Diksha

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