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अब TDS रिफंड के लिए ITR भरने की जरूरत नहीं, भरना होगा बस ये फॉर्म

इस कदम से उन लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जिनकी सालाना आय भले ही कम हो, लेकिन TDS कटने के कारण उन्हें ITR फाइल करना पड़ता है। खासकर उन नौकरीपेशा लोगों को, जिनकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख तक है और उन्होंने टैक्स बचत से जुड़े जरूरी दस्तावेज सही समय पर जमा नहीं किए। ऐसी स्थिति में कंपनियां TDS काट लेती हैं, जिससे बाद में रिफंड के लिए ITR फाइल करना पड़ता है।

Published: 13:06pm, 21 Jul 2025

छोटे करदाताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार अब टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने जा रही है। इसके लिए इनकम टैक्स बिल-2025 में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिससे TDS रिफंड पाने के लिए अब ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) फाइल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या है प्रस्ताव?

सरकार एक नया फॉर्म लाने की तैयारी में है जो कि TDS रिफंड के लिए ITR की जगह लेगा। यह फॉर्म Form 26AS में दिखने वाले TDS के आंकड़ों के आधार पर तैयार होगा और टैक्सपेयर्स को केवल एक साधारण क्लेम फॉर्म भरना होगा।

छोटी कमाई वालो के लिए राहत

इस कदम से उन लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जिनकी सालाना आय भले ही कम हो, लेकिन TDS कटने के कारण उन्हें ITR फाइल करना पड़ता है। खासकर उन नौकरीपेशा लोगों को, जिनकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख तक है और उन्होंने टैक्स बचत से जुड़े जरूरी दस्तावेज सही समय पर जमा नहीं किए। ऐसी स्थिति में कंपनियां TDS काट लेती हैं, जिससे बाद में रिफंड के लिए ITR फाइल करना पड़ता है।

डेटा एक्सेस को लेकर भी नए नियम

बिल में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि आयकर अधिकारी टैक्सपेयर के डिजिटल डेटा जैसे कि मोबाइल डिवाइस, अकाउंट बुक्स, खर्च और आमदनी के रिकॉर्ड तक पहुंच रख सकेंगे। इससे टैक्स प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और गलत जानकारी देने वालों पर आसानी से कार्रवाई हो सकेगी।

कब से लागू होगा नया नियम?

यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है। इसे पहले 2025–26 के बजट सत्र में संसद में पेश किया जाएगा। टास्क फोर्स‌, जिसने 285 सुझाव दिए हैं, उसके बाद यह बिल नया रूप लेगा।

Diksha