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ATM फ्रॉड में 11 साल बाद मिला इंसाफ, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया देगा 58 हजार रुपए का मुआवजा

दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने 2014 के एक ATM फ्रॉड मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को ग्राहक श्री पंवार को 58,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसमें 20,000 रुपये की मूल राशि, 11.5 साल का 10% ब्याज, 5,000 रुपये मुकदमे का खर्च और 10,000 रुपये मानसिक परेशानी का मुआवजा शामिल है।

Published: 08:00am, 11 Jul 2025

देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को एक पुराने एटीएम धोखाधड़ी मामले में दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन से कड़ी फटकार झेलनी पड़ी है। कमीशन ने बैंक को ग्राहक श्री पंवार को ₹58,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जो 2014 में हुए एक फ्रॉड से संबंधित है।

इस आदेश में ₹20,000 की मूल राशि, 11.5 वर्षों का 10% ब्याज, ₹5,000 का मुकदमा खर्च तथा ₹10,000 मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा शामिल है।

क्या था पूरा मामला?

दिनांक 4 जनवरी 2014 को श्री पंवार, जो दिल्ली में SBI के खाताधारक हैं, गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर मौजूद थे। उन्होंने वहां SBI ATM से ₹1,000 निकालने की कोशिश की लेकिन ट्रांजेक्शन असफल रहा। इसके बाद उन्होंने इंडियन ओवरसीज बैंक के ATM से ₹1,000 निकाल लिए और दिल्ली के लिए ट्रेन में सवार हो गए।

ट्रेन में चढ़ने के कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर SMS आए कि उनके डेबिट कार्ड से तीन बार नकद निकासी की गई: ₹1,000, ₹20,000 और ₹1,000। यह सभी ट्रांजेक्शन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के अलग-अलग ATM नंबरों से किए गए थे।

बैंक ने नहीं की मदद

दिल्ली पहुंचने के बाद 6 जनवरी 2014 को पंवार ने बैंक में कंप्यूटराइज्ड शिकायत दर्ज करवाई। SBI ने ₹1,000 वापस कर दिए लेकिन ₹20,000 को लेकर टालमटोल शुरू कर दी। पंवार ने 18 जनवरी को ऑनलाइन शिकायत दर्ज की और ATM की CCTV फुटेज मांगी, लेकिन बैंक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद उन्होंने 20 फरवरी को फिर से शाखा में जाकर शिकायत की, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।

RBI से भी नहीं मिली राहत, पहुंच गए उपभोक्ता फोरम

पंवार ने RBI बैंकिंग ओम्बड्समैन से संपर्क किया, लेकिन वहां भी प्रक्रिया लंबी और विफल रही। अंततः उन्होंने दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम में याचिका दायर की और कहा कि बैंक ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी मेहनत की कमाई ठगी गई।

डिस्ट्रिक्ट फोरम ने दिया न्याय

25 अक्टूबर 2017 को डिस्ट्रिक्ट फोरम ने पंवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए SBI को ₹20,000 के साथ 10% ब्याज, ₹5,000 मुकदमा खर्च और ₹10,000 मानसिक तनाव का मुआवजा देने का आदेश दिया। फोरम ने कहा कि RBI की “Zero Liability” और “Limited Liability” नीतियों के अनुसार अगर कोई ट्रांजेक्शन तीन कार्यदिवसों के भीतर रिपोर्ट किया जाए तो ग्राहक को हानि नहीं उठानी चाहिए।

SBI की अपील हुई खारिज

SBI ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन में अपील की और तर्क दिया कि श्री पंवार गुवाहाटी में थे, यह सिद्ध नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने ट्रेन टिकट प्रस्तुत नहीं की। बैंक ने यह भी कहा कि उनके ब्रांच मैनेजर की मृत्यु हो गई थी, इस कारण वह सुनवाई में भाग नहीं ले पाए। हालांकि, कमीशन ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

कमीशन ने पाया कि ट्रांजेक्शन की पुष्टि बैंक स्टेटमेंट व SMS से स्पष्ट हो रही है, और ट्रेन टिकट की जरूरत नहीं है। साथ ही बैंक मैनेजर की मृत्यु का कोई प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

अंतिम फैसला: बैंक को देना होगा मुआवजा

7 मई 2025 को दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने डिस्ट्रिक्ट फोरम के फैसले को सही ठहराया और SBI की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। कमीशन ने कहा कि बैंक की लापरवाही और उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी के कारण श्री पंवार को आर्थिक व मानसिक नुकसान हुआ।

YuvaSahakar Desk

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