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अमित शाह का नारी शक्ति के साथ सहकार संवाद: गरीबों, किसानों, गांवों और पशुओं की सेवा का माध्यम है सहकारिता

अमित शाह ने 'सहकार संवाद' के दौरान सहकारिता क्षेत्र के व्यापक विस्तार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना, डेयरी क्षेत्र में नवाचार, गोबर से आय के नए विकल्प, प्राकृतिक खेती, ऊंटनी के दूध के औषधीय मूल्य और पैक्स को 25 से अधिक सेवाओं से जोड़ने जैसे कई महत्वपूर्ण कदमों पर प्रकाश डाला।

Published: 12:33pm, 10 Jul 2025

  • सहकारिता क्षेत्र में पेशेवर युवाओं को तैयार करेगी त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी

  • सहकारी डेयरियों में गोबर प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य से आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

  • गांवों में दूध उत्पादन करने वाले 80% परिवारों को कोऑपरेटिव से जोड़ने का लक्ष्य

  • जन औषधि सेवा देने वाले PACS ग्रामीणों को सस्ती दवाओं के प्रति करेंगे जागरूक

  • प्राकृतिक खेती से न केवल स्वास्थ्य बेहतर बल्कि धरती की उर्वरता भी बरकरार

  • सहकारिता मंत्रालय गांव, गरीब और किसान के जीवन में ला रहा व्यापक परिवर्तन

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ‘सहकार संवाद’ कार्यक्रम में गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

कार्यक्रम में अमित शाह ने बताया कि आणंद जिले में ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की जा रही है। इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में प्रोफेशनल युवाओं को प्रशिक्षित करना है। यह यूनिवर्सिटी सहकारिता आंदोलन के जनक माने जाने वाले त्रिभुवनदास पटेल जी के नाम पर स्थापित की जा रही है, जिन्होंने गुजरात की डेयरी क्रांति की नींव रखी थी। आज गुजरात की 36 लाख महिलाएं सहकारी डेयरी से जुड़कर 80 हजार करोड़ रुपए का कारोबार कर रही हैं, जो उनके योगदान का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

शाह ने कहा कि संसद में जब इस यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवनदास पटेल के नाम पर रखने की घोषणा की गई, तब विपक्ष ने सवाल उठाया कि यह व्यक्ति कौन है। उन्होंने स्पष्ट किया “‘यह सवाल ठीक नहीं था, लेकिन यह त्रिभुवनदास जी की महानता को दर्शाता है कि उन्होंने बिना प्रचार के इतना बड़ा कार्य किया।” उन्होंने जोर देकर कहा कि त्रिभुवनदास जी को अब प्रसिद्धि का अधिकार है, और इसलिए यूनिवर्सिटी का नाम उनके नाम पर रखा गया।

डेयरी क्षेत्र में नवाचार और गोबर प्रबंधन

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने डेयरी क्षेत्र में व्यापक परिवर्तनों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सहकारी डेयरियों में गोबर प्रबंधन, पशुओं के खानपान और स्वास्थ्य प्रबंधन, और गोबर के उपयोग से आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। देश भर में गोबर के प्रबंधन और उपयोग के लिए छोटे-छोटे प्रयोग किए गए हैं, जिनके परिणामों को संकलित कर सभी सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाने की योजना है। श्री शाह ने बताया कि आने वाले समय में गोबर का उपयोग जैविक खाद और बायोगैस उत्पादन के लिए किया जाएगा, जिससे डेयरी किसानों की आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन से जुड़े 500 परिवारों में से कम से कम 400 परिवारों को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके तहत पशुओं के गोबर प्रबंधन और टीकाकरण की जिम्मेदारी भी सहकारी संस्थाएं संभालेंगी। अगले छह महीनों में इन योजनाओं को ठोस रूप देकर सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाया जाएगा।

पैक्स को बहु-कार्यात्मक बनाना

अमित शाह ने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) को सशक्त बनाने की योजना पर भी प्रकाश डाला। पैक्स को अब कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), माइक्रो एटीएम, हर घर नल, बैंक मित्र सहित लगभग 25 अन्य गतिविधियों से जोड़ा गया है। पैक्स के बायलॉज में संशोधन के बाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों के इंस्पेक्टर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने पैक्स से जुड़े लोगों से आग्रह किया कि वे इंस्पेक्टर्स से संपर्क कर नए बदलावों की जानकारी प्राप्त करें।

साथ ही, जन औषधि केंद्रों से जुड़े पैक्स को ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती दवाओं की उपलब्धता के बारे में जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया गया। श्री शाह ने कहा कि पैक्स को राजस्व अर्जन का स्रोत भी बनाना होगा, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पर्यावरण और धरती की सेहत के लिए भी लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों से उपजे अनाज से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं, जबकि प्राकृतिक खेती से उत्पादन में डेढ़ गुना वृद्धि देखी गई है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, जो यूरिया और डीएपी का विकल्प हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी, पानी और पर्यावरण की रक्षा होती है। सहकारिता मंत्रालय ने प्राकृतिक खेती से उपजे अनाज की खरीद के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था बनाई है और निर्यात से होने वाले मुनाफे को सीधे किसानों के खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है।

किसानों के लिए नई योजनाएं

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मक्का और दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए एनसीसीएफ और नाबार्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा प्रदान करेंगे। यदि बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है, तो किसान अपनी फसल वहां बेच सकते हैं। इसके अलावा, ऊंटनी के दूध के औषधीय गुणों पर शोध चल रहा है, और गुजरात व राजस्थान सरकारें मिलकर ऊंट पालन को बढ़ावा देने की योजना बना रही हैं।

सहकारिता मंत्रालय का योगदान

अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय देश के गरीबों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समर्पित है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि गृह मंत्रालय से भी बड़ा दायित्व सहकारिता मंत्रालय का है, क्योंकि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि आणंद में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना से शुरू हुआ सहकारी आंदोलन आज 19 राज्यों तक फैल चुका है।

YuvaSahakar Desk

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