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ग्रामीण और शहरी भारत में बदला भोजन का अंदाज, अनाज और दालों की खपत घटी, दूध और प्रोटीन बढ़ा

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज और दालों का सेवन कम हुआ है, जबकि दूध, डेयरी उत्पादों, अंडे, मछली और मांस की खपत में वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण और शहरी निम्न आय वर्गों में कैलोरी की खपत बढ़ी है, और आय में वृद्धि के साथ कैलोरी खपत का सकारात्मक संबंध देखा गया है।

Published: 13:10pm, 07 Jul 2025

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा वर्ष 2023-24 के लिए किए गए घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के खानपान की आदतों में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है। यह सर्वे अगस्त 2022 से जुलाई 2023 और अगस्त 2023 से जुलाई 2024 की अवधि के बीच किया गया था।

अनाज और दालों की खपत में कमी

सर्वे के अनुसार, अनाज और दालों की खपत में थोड़ी गिरावट आई है।

  • शहरी इलाकों में अनाज का अनुपात कुल भोजन में 2022-23 में 38.8% था, जो 2023-24 में घटकर 38.7% रह गया।

  • ग्रामीण इलाकों में यह गिरावट अधिक रही – 46.9% से घटकर 45.9%।

  • दालों की खपत शहरी क्षेत्रों में 9.6% से घटकर 9.1% और ग्रामीण क्षेत्रों में 8.8% से घटकर 8.7% रह गई है।

दूध, अंडा, मांस और अन्य खाद्य पदार्थों का बढ़ा उपभोग

सर्वे से यह भी पता चलता है कि प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध, अंडे और मांस की खपत में इजाफा हुआ है।

  • शहरी क्षेत्रों में दूध व डेयरी उत्पादों की हिस्सेदारी 12.8% से बढ़कर 12.9% हो गई।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में यह 10.6% से बढ़कर 11% हुई।

  • अंडा, मछली और मांस की खपत ग्रामीण क्षेत्रों में 12.3% से बढ़कर 12.4% हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 14.1% पर स्थिर रही।

  • अन्य खाद्य वस्तुओं का अनुपात ग्रामीण भारत में 21.4% से बढ़कर 22% और शहरी भारत में 24.8% से बढ़कर 25.3% हो गया।

निम्न आय वर्गों में कैलोरी की खपत में वृद्धि

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि ग्रामीण भारत के सबसे निचले पांच आय वर्गों और शहरी भारत के सबसे निचले छह आय वर्गों में औसत कैलोरी खपत में वृद्धि हुई है। यह संकेत करता है कि सरकार की योजनाओं व पोषण संबंधी जागरूकता अभियानों का सकारात्मक प्रभाव गरीब वर्गों पर पड़ा है।

आय और कैलोरी खपत में सीधा संबंध

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि जैसे-जैसे किसी व्यक्ति या परिवार का मासिक उपभोग व्यय बढ़ता है, वैसे-वैसे उनकी औसत कैलोरी खपत भी बढ़ती है। यानी भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार देखने को मिलता है।

YuvaSahakar Desk