भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने ग्रामीण बैंकिंग को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देशभर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) में कंप्यूटरीकरण तेजी से हो रहा है। अब तक 89% PACS में जरूरी हार्डवेयर पहुंच चुका है और 71% PACS ने ‘डे-एंड प्रोसेस’ पूरा कर लिया है। यह प्रक्रिया हर दिन के लेन-देन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से बंद करने की होती है।
इसके अलावा, 25% PACS ने ऑनलाइन ऑडिट भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, बिहार, झारखंड और त्रिपुरा इस काम में सबसे आगे हैं। अब तक PACS के जरिए पूरे देश में 18.59 करोड़ डिजिटल लेन-देन किए जा चुके हैं।
लेन-देन के मामले में राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड सबसे आगे हैं। सरकार ने आदेश दिए हैं कि अक्टूबर 2025 तक सभी PACS में ऑनलाइन ऑडिट पूरा किया जाए और हर दिन का लेन-देन केवल ERP सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाए।
PACS को ग्रामीण विकास में भागीदारी बढ़ाने के लिए कम से कम तीन अतिरिक्त सेवाएं शुरू करने को भी कहा गया है, जैसे – पीएम किसान समृद्धि केंद्र, जन औषधि केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर।
राज्यों को उनकी प्रगति के अनुसार निर्देश भी दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश को बाकी हार्डवेयर खरीदने को कहा गया है, जबकि ओडिशा को कंप्यूटरीकरण की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश मिला है। सभी राज्यों को ज़रूरी स्टाफ की भर्ती भी तेज़ी से पूरी करनी होगी।


