भारत का एक उच्चस्तरीय सहकारी प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय सहकारी महासंघ (ICA) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इंग्लैंड के मैनचेस्टर पहुँचा है। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव और दिलीप संघानी कर रहे हैं। बैठक 2 जुलाई 2025 को आयोजित होगी और इसके साथ ही चार दिन का “फेस्टिवल ऑफ कोऑपरेटिव्स” भी शुरू होगा।
यह खास मौका ICA की 130वीं वर्षगांठ और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष 2025 का भी जश्न है। इस आयोजन की मेज़बानी यूके की प्रमुख सहकारी संस्थाएं कर रही हैं। मैनचेस्टर, जो आधुनिक सहकारी आंदोलन का जन्मस्थान है, इस कार्यक्रम के लिए बेहद खास माना जा रहा है। इसमें रोचडेल के ऐतिहासिक संग्रहालय जैसी जगहों का दौरा भी शामिल है।
2 जुलाई को सुबह ICA बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें कई अहम प्रस्ताव, बजट और नीतिगत बदलावों पर चर्चा होगी। उसी दिन शाम को एक जनरल असेंबली आयोजित होगी जिसमें ICA के अध्यक्ष एरियल गुआरको और डायरेक्टर जनरल जेरोन डगलस की मौजूदगी में निर्णय लिए जाएंगे।
भारत की भागीदारी इस वैश्विक मंच पर काफी मजबूत दिखाई दे रही है। डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, जो ICA के वाइस प्रेसिडेंट और कृभको व एनसीयूआई के प्रमुख हैं, का इसमें अहम योगदान है। वहीं, इफ्को बोर्ड के सदस्य आदित्य यादव, जो सबसे युवा ICA बोर्ड डायरेक्टर हैं, भारत की युवा नेतृत्व को दर्शा रहे हैं। भिमा सुब्रह्मण्यम, जो इंटरनेशनल कोऑपरेटिव बैंकिंग एसोसिएशन (ICBA) के प्रमुख हैं, 3 जुलाई को ICBA की जनरल असेंबली की अध्यक्षता करेंगे।
इस आयोजन में दुनिया भर से विभिन्न क्षेत्रों के सहकारी नेता भाग ले रहे हैं – जैसे हाउसिंग, बीमा, मत्स्य पालन और उपभोक्ता मामलों से जुड़े लोग। साथ ही, लैंगिक समानता, युवा, शिक्षा और G20 वर्किंग ग्रुप जैसे विषयों पर विशेष सत्र भी होंगे।
मैनचेस्टर की यह बैठक ICA के भविष्य की दिशा तय करेगी और 2030 तक की रणनीति पर चर्चा करेगी। भारत की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि वैश्विक सहकारी आंदोलन में भारत अब एक मजबूत और निर्णायक भूमिका निभा रहा है।


