केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित “मंथन बैठक” की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सहकारिता विभागों के सचिव शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में चल रही पहलों की समीक्षा, उपलब्धियों का मूल्यांकन और राज्यों के बीच अनुभव साझा करना था।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि भारत जैसे 140 करोड़ जनसंख्या वाले देश के लिए GDP और GSDP के साथ-साथ रोजगार सृजन सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति को रोजगार दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका सहकारिता क्षेत्र ही हो सकता है। इसी दृष्टिकोण से चार वर्ष पूर्व सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई थी।
शाह ने कहा कि ग्राम स्तर तक सहकारिता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार का लक्ष्य है कि अगले 5 वर्षों में ऐसा कोई गांव न रहे जहां कम से कम एक कोऑपरेटिव संस्था न हो। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का अधिकतम उपयोग करें और अपने राज्यों में सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से जोड़ें ताकि प्रशिक्षण का एक समग्र तंत्र तैयार किया जा सके।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति जल्द ही घोषित की जाएगी, जो वर्ष 2025 से लेकर 2045 तक लागू रहेगी और स्वतंत्रता की शताब्दी तक सहकारिता को एक प्रमुख स्तंभ बनाने में सहायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राज्य को अपनी सहकारिता नीति इस राष्ट्रीय नीति के अनुरूप तैयार करनी चाहिए।
अमित शाह ने 2 लाख बहु-उद्देशीय पैक्स (PACS) के निर्माण की योजना को समय से पहले फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का भी लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि यदि हम समय से पहले इस लक्ष्य को प्राप्त करते हैं, तो सहकारी क्षेत्र की ताकत को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।
बैठक में अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों और क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटीज की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन लाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। शाह ने कहा कि इन संस्थाओं को अब बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के अंतर्गत लाया गया है और आरबीआई ने भी लचीला दृष्टिकोण अपनाया है। अब आवश्यकता है कि नियुक्तियों और संचालन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
प्राकृतिक खेती को सहकारिता के माध्यम से बढ़ावा देने की दिशा में भी उन्होंने राज्यों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कृषि मंत्रियों के साथ समन्वय बनाकर इसे आगे बढ़ाएं, जिससे धरती माता और आमजन दोनों को लाभ मिले।
बैठक में केंद्र सरकार की सहकारी पहलों की समीक्षा की गई और ‘सहकार से समृद्धि’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के लिए सभी प्रतिनिधियों ने मिलकर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई।


