उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जेवर एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित देश के सबसे बड़े निर्यात केंद्र को विश्व बैंक ने मंजूरी प्रदान कर दी है। यह केंद्र विश्व बैंक द्वारा पोषित उत्तर प्रदेश कृषि विकास और ग्रामीण उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण (यूपी एग्रीज) परियोजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
परियोजना की रूपरेखा और प्रोत्साहन
प्रस्तावित निर्यात केंद्र में यूपी एग्रीज की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत निजी क्षेत्र के भागीदारों की होगी। राज्य सरकार ने निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई रियायतें देने का निर्णय लिया है, जिसमें 50 एकड़ भूमि पर 75 प्रतिशत अनुदान, स्टांप शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट और दो वर्षों तक बिजली शुल्क में छूट शामिल है। इसके अतिरिक्त, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई), विदेशी आपूर्ति श्रृंखला निवेश (एफएससीआई), और फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
विश्व बैंक की समीक्षा और डीपीआर
26 से 30 मई 2025 के बीच यूपी एग्रीज की प्रगति का जायजा लेने आई विश्व बैंक की टीम ने इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की सिफारिश की। मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस केंद्र को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त करने का निर्णय लिया गया। इसमें फल-सब्जियों की ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शीघ्र तैयार की जाएगी, और केंद्र को अगले वर्ष तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह निर्यात केंद्र उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र को वैश्विक मंच पर स्थापित करेगा और काला नमक चावल, मूंगफली, सब्जियों जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा। यह परियोजना न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।


