- NEP 2020 ने बदली देश की शिक्षा की तस्वीर, भारत बना दुनिया का तेजी से बढ़ता एजुकेशन सिस्टम: धर्मेंद्र प्रधान
भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) ने QS विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2026 में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 54 भारतीय विश्वविद्यालयों ने वैश्विक मंच पर अपनी जगह बनाई है। इस वर्ष आठ नए संस्थानों के प्रवेश के साथ, भारत विश्व में चौथा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश बन गया है, जो केवल अमेरिका, ब्रिटेन और चीन से पीछे है। पिछले एक दशक में भारत ने 390% की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की, जिसने इसे G20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ता शिक्षा तंत्र बनाया है।
इस वर्ष, 48% भारतीय विश्वविद्यालयों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। पांच भारतीय संस्थानों ने नियोक्ता प्रतिष्ठा (Employer Reputation) में वैश्विक शीर्ष 100 में स्थान प्राप्त किया है, जबकि अनुसंधान उत्कृष्टता में आठ संस्थानों ने प्रति संकाय उद्धरण (Citations per Faculty) में शीर्ष 100 में जगह बनाई। भारतीय संस्थानों का औसत स्कोर (43.7) जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका से भी आगे है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने 123वें वैश्विक स्थान के साथ भारतीय विश्वविद्यालयों का नेतृत्व किया, जो 2024 में 197वें स्थान से 70 से अधिक स्थानों की उल्लेखनीय छलांग है। यह प्रगति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और सरकार की सुधारों का परिणाम है, जिन्होंने गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, “54 उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ भारत ने QS विश्व रैंकिंग 2026 में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 2014 में केवल 11 विश्वविद्यालयों से लेकर अब 54 तक की यह पांच गुना वृद्धि, पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में लागू की गई परिवर्तनकारी शैक्षिक सुधारों का प्रमाण है। NEP 2020 न केवल हमारे शैक्षिक परिदृश्य को बदल रहा है, बल्कि इसे क्रांतिकारी रूप दे रहा है। यह गर्व की बात है कि भारत G20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ता शिक्षा तंत्र है और केवल अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के बाद चौथा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश है।”
धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा, “NEP 2020 के अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर के साथ, मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में और अधिक भारतीय संस्थान वैश्विक उत्कृष्टता के शिखर पर पहुंचेंगे।” यह उपलब्धि भारत के शिक्षा तंत्र में बढ़ते वैश्विक विश्वास और ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


