Trending News

 LPG पर बोले PM नरेंद्र मोदी- देश में पैनिक फैलाने की कोशिश कर रहे कुछ लोग, देशवासियों को किया आश्वस्त, कहा- अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है सरकार, कालाबाजारी करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई          आज प्रधानमंत्री जारी करेंगे पीएम-किसान की 22वीं किस्त, 9.32 करोड़ किसानों को मिलेंगे 18,640 करोड़ रुपये         किसानों को सहकारी बैंक से 7 दिन में फसल ऋण, e-KCC से सिर्फ 2 दिन में लोन की सुविधा, समय पर लोन चुकाने पर 3% ब्याज की छूट, राज्यसभा में अमित शाह ने दी जानकारी         भारत बनेगा बन रहा दुनिया का फूड बास्केट, 9 FTA से भारत के लिए 38 देशों के बाजार खुले, AAHAR के 40वें संस्करण को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दी जानकारी         जल जीवन मिशन 2.0 को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण घर में होगा नल से जल, 8.69 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया         मार्च में मौसम में लगातार बदलाव, गुजरात-राजस्थान में हीटवेव और लू का ऑरेंज अलर्ट, महाराष्ट्र में हीटवेव का यलो अलर्ट, 13 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट       

कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: अन्नदाताओं को डिजिटल किसान आईडी और फसल सर्वे से सीधा लाभ

AgriStack के तहत अब तक 14 राज्यों में 6.4 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से 4.3 करोड़ को PM-KISAN से जोड़ा गया है। सरकार ने 2025-26 में इस डिजिटल ढांचे को मजबूत करने के लिए किसान रजिस्ट्रियों के विकास हेतु ₹4,000 करोड़ और DCS के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है।

Published: 12:39pm, 18 Jun 2025

भारत सरकार कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में बड़ी पहल कर रही है। AgriStack पहल के तहत, डिजिटल किसान पहचान पत्र (Kisan Pehchaan Patra) और डिजिटल फसल सर्वे (Digital Crop Survey – DCS) के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शिता के साथ दिया जा रहा है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, अब किसानों की डिजिटल आईडी को उनके भूमि अभिलेखों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), फसल बीमा योजना (PMFBY), कृषि ऋण, और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं का लाभ बिना किसी कागज़ी कार्रवाई के मिल रहा है।

AgriStack के तहत अब तक 14 राज्यों में 6.4 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से 4.3 करोड़ को PM-KISAN से जोड़ा गया है। सरकार ने 2025-26 में इस डिजिटल ढांचे को मजबूत करने के लिए किसान रजिस्ट्रियों के विकास हेतु ₹4,000 करोड़ और DCS के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है।

अब नए लाभार्थियों के लिए PM-KISAN में पंजीकरण के लिए डिजिटल किसान आईडी अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, किसानों द्वारा लिए गए किसान क्रेडिट कार्ड ऋण और फसल बीमा दावे को सत्यापित करने के लिए DCS से प्राप्त फसल बोआई डेटा का उपयोग किया जा रहा है।

DCS के जरिए 12 राज्यों में फसल उत्पादन का आकलन शुरू हो चुका है। रबी 2024-25 में यह सर्वे 17 राज्यों में किया गया। कृषि मंत्रालय का लक्ष्य है कि यह प्रणाली पूरे देश में लागू हो।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और गुजरात में किसान आईडी और भू-आधारित नक्शों की मदद से मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र, यूपी और एमपी में एक घंटे में डिजिटल फसल ऋण की स्वीकृति के पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक 11 करोड़ किसानों को यह डिजिटल पहचान दी जाए। मीडिया को दिये एक बयान मे कृषि सचिव देवेन्द्र चतुर्वेदी ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे किसान रजिस्ट्रियों को भूमि अधिकार अभिलेखों से जोड़ें ताकि हर किसान को उसकी ज़रूरत के अनुसार सेवाएं मिल सकें।

YuvaSahakar Desk

Recent Post