भारत के परिवहन क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में, सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है। यह सहकारी समिति दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में परिचालन करेगी, जिसका उद्देश्य टैक्सी चालकों को सशक्त बनाना और सहकारी उद्यमिता को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा प्रवर्तित इस पहल को भारत की सात अग्रणी सहकारी संस्थाओंअमू ल, नेफेड, नाबार्ड, इफको, कृभको, एनडीडीबी और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) का मजबूत समर्थन प्राप्त है।
सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव का मॉडल उबर और ओला जैसे प्रमुख राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्मों की तकनीकी विशेषताओं को अपनाएगा, लेकिन इसका एक अनूठा पहलू यह है कि इसका स्वामित्व और प्रबंधन पूर्ण रूप से इसके सदस्यों, यानी टैक्सी चालकों के हाथों में होगा। यह सहकारी मॉडल समान लाभ साझाकरण, पारदर्शी और लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देगा, जिससे चालकों की आय और कार्यस्थितियों में उल्लेखनीय सुधार होगा। इस पहल का मूल मंत्र “सहकार से समृद्धि” है, जो सहकारी मूल्यों पर आधारित समावेशी और टिकाऊ परिवहन सेवाओं को सुनिश्चित करता है।
इस सहकारी समिति की अधिकृत शेयर पूंजी 300 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें से आठ प्रवर्तक सहकारी समितियों ने 80 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। प्रत्येक प्रवर्तक ने इस अभिनव पहल की नींव को मजबूत करने के लिए 10 करोड़ रुपये की पूंजी समर्पित की है। परिचालन की शुरुआत अगले छह महीनों में होने की उम्मीद है, क्योंकि सॉफ्टवेयर और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से चल रहा है। प्रारंभिक परिचालन की देखरेख के लिए एक अंतरिम बोर्ड का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष एनसीडीसी के उप प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता हैं। बोर्ड में अन्य प्रमुख सदस्यों में वी. श्रीधर (एनडीडीबी), तरुण हांडा (नेफेड), नवीन कुमार (नाबार्ड), संतोष शुक्ला (इफको) और एलपी गॉडविन (कृभको) शामिल हैं।
सहकार टैक्सी की सबसे बड़ी विशेषता इसका सहकारी ढांचा है, जिसमें टैक्सी चालक न केवल सेवा प्रदाता होंगे, बल्कि सहकारी समिति के सह-मालिक भी होंगे। यह मॉडल चालकों को निष्पक्ष लाभ वितरण, निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी और बेहतर कार्यस्थितियों का अवसर प्रदान करेगा। प्रारंभ में, यह पहल गुजरात और महाराष्ट्र के टैक्सी चालकों को शामिल करने पर केंद्रित है, लेकिन भविष्य में इसे पूरे देश में विस्तारित करने की योजना है।
इस परियोजना को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए, सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) बैंगलोर जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। यह सहयोग उद्योग मानकों के अनुरूप तकनीकी विकास, परिचालन प्रणालियों और डिजिटल एकीकरण को सुनिश्चित करेगा। यह पहल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दृष्टिकोण का परिणाम है, जिन्होंने एक ऐसी सहकारी टैक्सी सेवा की आवश्यकता पर बल दिया था, जो दोपहिया, रिक्शा, टैक्सी और चार पहिया वाहनों को एक ही मंच पर एकीकृत करे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि इस मॉडल से प्राप्त लाभ सीधे चालकों तक पहुंचेगा, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होगा।
सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड न केवल भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती, कुशल और विश्वसनीय परिवहन सेवाएं प्रदान करेगा, बल्कि यह टैक्सी चालकों के लिए एक टिकाऊ और समावेशी आजीविका मॉडल भी स्थापित करेगा। यह पहल सहकारी समितियों के बीच सहयोग के सिद्धांत को मजबूत करते हुए, भारत के परिवहन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी, जो प्रौद्योगिकी, समावेशिता और सहकारी मूल्यों पर आधारित होगा।


