उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में आम उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रशासन की पहल पर अब उन्नाव के आमों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाएगी, जिससे न केवल इन आमों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि जिले के लगभग 20 हजार आम उत्पादक किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना भी बनेगी।
इस अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी गौरांग राठी द्वारा की गई है। उन्होंने ‘किसान तक’ कार्यक्रम के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि उन्नाव के आमों को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारियों एवं निर्यातकों से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य उन्नाव के आमों को देश और विदेश दोनों स्तरों पर बाजार दिलाकर उनकी गुणवत्ता और ब्रांड को स्थापित करना है।
उन्नाव जिले के सफीपुर, बांगरमऊ और हसनगंज क्षेत्र आम उत्पादन के प्रमुख बेल्ट माने जाते हैं। उद्यान विभाग के अनुसार, जिले में हर वर्ष लगभग 6.60 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जिसमें दशहरी, लंगड़ा और चौसा जैसी प्रीमियम किस्में शामिल हैं। लेकिन अब तक किसानों को उनकी फसल का समुचित मूल्य नहीं मिल पाता था, क्योंकि निर्यातकों से सीधा संपर्क न होने के कारण बिचौलिये ही अधिक लाभ उठा लेते थे।
अब इस व्यवस्था को बदलते हुए मियांगंज में हाईटेक ग्रेडिंग मशीनें स्थापित की जाएंगी, जिससे आमों को गुणवत्ता के अनुसार छांटा और बेचा जा सकेगा। इसके अलावा उन्नत पैकेजिंग के लिए गनी बैग और आधुनिक बोरियों की व्यवस्था भी की जा रही है। मियांगंज को एक नई फल मंडी के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।
ज्ञात हो कि उन्नाव जिले को वर्ष 2021 में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत आम उत्पादन के लिए चिन्हित किया गया था। अब इस दिशा में हो रही पहल से किसानों को बेहतर कीमतें, ब्रांडिंग और सीधी मार्केटिंग के अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी आमदनी में स्थायी रूप से सुधार होगा।


