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राजस्थान: सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवा सहकारी समितियों का होगा गठन, सहकारिता नेटवर्क होगा मजबूत

राजस्थान की प्रमुख शासन सचिव (सहकारिता) मंजू राजपाल ने सभी शेष ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन के लिए तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। यह पहल सहकारिता नेटवर्क को मजबूत करेगी और योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचाएगी।

Published: 15:52pm, 10 Jun 2025

राजस्थान सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, मंजू राजपाल ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित अपने कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नवीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप प्रदेश की सभी शेष ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन किया जाना है। इससे राज्य में सहकारिता नेटवर्क को मजबूती मिलेगी तथा अधिक से अधिक ग्रामीण जन सहकारिता योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि समिति गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और निर्धारित समय से पूर्व ही शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जाए। बैठक में उन्होंने बताया कि बहुउद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समितियों की स्थापना के लिए सदस्य संख्या एवं न्यूनतम हिस्सेदारी राशि के मापदंडों में 50 प्रतिशत की शिथिलता दी गई है। अब नवीन समिति की स्थापना के लिए न्यूनतम 150 सदस्य तथा न्यूनतम 1.50 लाख रुपये की हिस्सेदारी राशि अनिवार्य है।

कम जनसंख्या घनत्व वाले जिलों में आवश्यकतानुसार और अधिक शिथिलता देने पर भी विचार किया जाएगा। प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि इस शिथिलता की जानकारी पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों, जिला परिषद् सीईओ आदि को पत्र द्वारा अवगत कराया जाए, ताकि इसका अधिकाधिक लाभ उठाया जा सके।

साथ ही, समिति गठन की बैठकों में पंचायतीराज विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रस्ताव तैयार होने के तुरंत बाद उसे अनुमोदन हेतु भिजवाया जाए, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।

राजपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति गठन की प्रक्रिया को केवल माहवार लक्ष्यों तक सीमित न रखते हुए समानांतर रूप से सभी शेष ग्राम पंचायतों में क्रियान्वित किया जाए।

उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल के बाद अब तक राज्य में 118 नवीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। इस कार्य में और अधिक गति लाने के लिए सभी अतिरिक्त रजिस्ट्रार (खंड) नियमित समीक्षा करें। जिन जिलों में लक्ष्य अधिक हैं, वहां पृथक रणनीति अपनाई जाए।

खनन क्षेत्र वाले जिलों में महिला समितियों के गठन पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में वन धन विकास केन्द्रों के समन्वय से ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन किया जा सकता है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मूल समिति से सदस्य पृथक कर नई समिति बनाने की बजाय 150 नए सदस्यों को शामिल कर समितियों का गठन किया जाए।

वीसी के माध्यम से आयोजित इस बैठक में अतिरिक्त रजिस्ट्रार (द्वितीय) संदीप खण्डेलवाल, संयुक्त रजिस्ट्रार (आयोजना) अनिल कुमार सहित सभी अतिरिक्त रजिस्ट्रार (खंड) एवं जिला उप रजिस्ट्रार उपस्थित रहे।

YuvaSahakar Desk