केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और डिजिटल पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 29 मई को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो, अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, गूगल, पेटीएम समेत 50 से अधिक ई-कॉमर्स कंपनियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को भ्रमित कर निर्णय लेने के लिए बाध्य करने वाली डिज़ाइन रणनीतियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार डिजिटल उपभोक्ताओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस दिशा में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या होते हैं डार्क पैटर्न्स?
डार्क पैटर्न्स ऐसे डिज़ाइन एलिमेंट होते हैं जो उपभोक्ताओं को बिना जानकारी के कोई सेवा स्वीकार करने, सब्सक्रिप्शन चालू रखने या उत्पाद खरीदने के लिए भ्रमित करते हैं। इनमें छिपे हुए कैंसिलेशन विकल्प, पूर्व-चिह्नित चेकबॉक्स, गुमराह करने वाले ऑफर आदि शामिल हैं।
डार्क पैटर्न ऐसी डिजाइन रणनीतियां या फीचर्स हैं, जो जानबूझकर उपभोक्ताओं को बिना पूर्ण जानकारी के निर्णय लेने के लिए प्रेरित करते हैं, जैसे छिपे हुए कैंसलेशन बटन, स्वतः चयनित विकल्प, या भ्रामक ऑफर। सरकार ने अब तक 13 प्रकार के डार्क पैटर्न की पहचान की है, जिन्हें रोकने के लिए दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं। प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया कि सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को देश के कानूनों का पालन करना अनिवार्य है और डार्क पैटर्न का उपयोग करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
11 कंपनियों को जारी हुए नोटिस
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि डार्क पैटर्न्स से जुड़े मामलों में अब तक 401 नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 11 नोटिस सीधे इन तकनीकों के दुरुपयोग को लेकर हैं। Zepto, Uber, Ola, Rapido सहित कई प्रमुख प्लेटफॉर्म इन नोटिस की सूची में शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक जानबूझकर की गई रणनीति है, जिसके लिए एल्गोरिदम का दुरुपयोग किया गया है।
थर्ड पार्टी विक्रेताओं पर भी होगी सख्ती
बैठक में यह भी तय हुआ कि केवल मुख्य प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि उनके माध्यम से सेवाएं देने वाले थर्ड पार्टी विक्रेताओं को भी उपभोक्ता संरक्षण के सभी नियमों का पालन करना होगा। सभी प्लेटफॉर्म्स को ‘ऑप्ट आउट’ और ‘कैंसिलेशन’ विकल्प को सरल और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
तीन डिजिटल टूल्स लॉन्च
उपभोक्ता हितों को संरक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन डिजिटल टूल्स भी लॉन्च किए हैं:
1. जागृति: उपभोक्ता शिक्षा एवं जागरूकता के लिए
2. जागो ग्राहक जागो – शिकायत पंजीकरण के लिए
3. जागृति डैशबोर्ड: निगरानी और विश्लेषण के लिए
संयुक्त वर्किंग ग्रुप का गठन प्रस्तावित
सरकार ने कंपनियों से आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही, एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिस पर कंपनियों ने सहयोग का आश्वासन दिया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी ने डार्क पैटर्न की सरकारी परिभाषा पर आपत्ति नहीं जताई है, अतः कानूनी विवाद की संभावना नहीं है।


