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ग्राहक से जबरन मोबाइल नंबर मांगना गैरकानूनी, चंडीगढ़ उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला

चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित एक जूता विक्रेता द्वारा ग्राहक से जबरन मोबाइल नंबर मांगने के मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि अब शहर का कोई भी विक्रेता ग्राहकों से जबरदस्ती मोबाइल नंबर नहीं मांग सकता। यह आदेश गोपनीयता कानून के उल्लंघन को देखते हुए जारी किया गया है।

Published: 16:04pm, 21 May 2025

राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़ ने उपभोक्ताओं की गोपनीयता की रक्षा के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अब शहर के किसी भी विक्रेता को ग्राहकों से उनकी निजी जानकारी, विशेषकर मोबाइल नंबर, जबरन लेने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश एक ग्राहक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के पश्चात जारी किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता ने विक्रेता पर जबरदस्ती मोबाइल नंबर मांगने का आरोप लगाया था।

प्रकरण के अनुसार, चंडीगढ़ के सेक्टर 17 स्थित एक प्रतिष्ठित जूता ब्रांड के आउटलेट पर एक ग्राहक से मोबाइल नंबर मांगा गया था। ग्राहक द्वारा जानकारी देने से मना करने पर कर्मचारियों और ग्राहक के मध्य वाद-विवाद उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात ग्राहक ने उक्त विक्रेता के विरुद्ध उपभोक्ता आयोग में याचिका दर्ज कराई, जिसमें ₹20,000 का मुआवजा और ₹1 लाख की पेनल्टी की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता श्री पंकज चांदगोठिया ने आयोग को अवगत कराया कि दुकानदारों द्वारा मोबाइल नंबर मांगना उपभोक्ताओं की गोपनीयता का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल नंबर अब बैंकिंग सेवाओं से लेकर व्यक्तिगत दस्तावेजों तक से जुड़ा होता है, जिसके कारण इसका दुरुपयोग होने की प्रबल संभावना रहती है। यदि यह संवेदनशील जानकारी गलत हाथों में चली जाए, तो उपभोक्ता को वित्तीय और सामाजिक हानि का सामना करना पड़ सकता है।

आयोग ने 26 मई 2023 को भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी विक्रेता बिक्री के समय ग्राहकों से मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार की निजी जानकारी मांगने का अधिकार नहीं रखता। यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का हनन है, बल्कि अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की जानकारी का संग्रहण और खुलासा एक दंडनीय अपराध है।

राज्य आयोग ने इस आदेश को व्यापक स्तर पर लागू करते हुए चंडीगढ़ के सभी विक्रेताओं और ब्रांड आउटलेट्स को अधिसूचना का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह आदेश उपभोक्ताओं की निजता की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसका उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

यह मामला अभी विचाराधीन है और आगामी सुनवाई 29 मई 2025 को निर्धारित की गई है।

YuvaSahakar Desk