मंगलवार को जारी अप्रैल महीने के खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों ने देश में बढ़ती महंगाई की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। खास बात यह है कि जिन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई दर देखी गई, वहां गैर भाजपाई दलों की सरकारें सत्ता में हैं। केरल, कर्नाटक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे गैर भाजपाई राज्यों में महंगाई पर काबू पाने में सरकारें पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं, जिसका खामियाजा वहां की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, जिस राज्य में सबसे अधिक महंगाई दर है, वो केरल है। केरल में सबसे अधिक महंगाई दर 5.9% है। केरल के बाद दूसरे स्थान पर जो राज्य है वो कर्नाटक है जहां महंगाई दर 4.3% है। जम्मू-कश्मीर में महंगाई दर कर्नाटक के सामान ही 4.3% है। इसके बाद पंजाब राज्य आता है जहां 4.1% की डर से महंगाई बढ़ी है।
सबसे अधिक महंगाई दर वाले ये जो राज्य हैं, वहां केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के विरोधी दल सत्ता में हैं। विपक्षी दल केंद्र सरकार को बढ़ती महंगाई के लिए कोसते हैं लेकिन जब देश के ज़्यादातर राज्यों में महंगाई दर नियंत्रित नजर आ रही है, तब गैर भाजपाई राज्यों में महंगाई दर सबसे ज्यादा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गैर भाजपाई राज्य महंगाई रोकने में असफल क्यों साबित हो रहे हैं।
महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जो होता है वो ये है कि इन राज्य सरकारें मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में विफल रही हैं, जिसके चलते कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित न कर पाने के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ गया है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता है कि इन राज्यों में बिचौलियों का एक मजबूत नेटवर्क सक्रिय है, जो कृत्रिम रूप से माल की आपूर्ति को बाधित कर रहे हैं। यह जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहा है, जिससे महंगाई और बढ़ रही है। गैर भाजपाई सरकारों की नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के चलते बिचौलियों को खुली छूट मिल रही है।
महंगाई बढ़ने के अन्य कारणों में गैर भाजपाई राज्यों में खराब प्रशासनिक नीतियां भी शामिल हैं। आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम न उठाया जाना भी बढ़ती महंगाई का एक कारण हो सकता है, जिसके चलते आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके साथ ही, बाजार नियंत्रण तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने से भी जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलता है।
इसके अलावा संभव है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन न होने और वितरण प्रणाली में खामियों के कारण आम जनता तक आवश्यक वस्तुएं महंगी दरों पर पहुंच रही हैं। ताजा रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि विगैर भाजपाई राज्य न केवल महंगाई पर काबू पाने में विफल रहे हैं, बल्कि इनकी लचर नीतियों और नियंत्रणहीन प्रशासन ने जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।


