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देशभर में चलेगा “विकसित कृषि संकल्प अभियान”, किसानों को खेतों तक मिलेगी वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी

देशभर के 700 से ज्यादा जिलों में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, नई किस्मों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। इस अभियान से खेती को वैज्ञानिक, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया जाएगा।

Published: 17:06pm, 13 May 2025

केंद्र सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज किस्मों, और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा 29 मई से 12 जून 2025 तक “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का आयोजन किया जाएगा। यह राष्ट्रव्यापी अभियान देश के 700 से अधिक जिलों में संचालित होगा, जिसका उद्देश्य खेती को उन्नत और लाभकारी बनाना है।

सीधे संवाद से बढ़ेगी जागरूकता

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत मंत्रालय, कृषि अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, कर्मचारी तथा राज्य के कृषि अधिकारी स्थानीय टीम बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। अभियान का उद्देश्य खेतों तक ज्ञान पहुंचाना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।

कृषि मंत्री ने बताया कि टीमों में शामिल विशेषज्ञ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और कृषि यंत्रीकरण जैसे विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। साथ ही, अभियान के दौरान किसानों को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी जाएगी।

ड्रोन और ICT तकनीक का होगा प्रदर्शन

अभियान में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई है। इसमें केवीके और ICAR के माध्यम से ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग का प्रदर्शन किया जाएगा। आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जाएगी। किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG) और कृषि उद्यमियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि इस अभियान में शामिल टीम किसानों को धान की सीधी बुवाई (DSR), सोयाबीन में मशीन आधारित खेती और अन्य उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने का कार्य करेंगी। इसके अलावा, प्राकृतिक और जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों की लागत घटे और आय में वृद्धि हो।

तीन माह में दिखेगा असर

शिवराज सिंह  चौहान ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि परिणाम आधारित कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि यह पहल एक दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, लेकिन इसके परिणाम बहुत जल्द, खरीफ सीजन के भीतर ही देखने को मिलेंगे। यह कार्यक्रम देश की कृषि नीति में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

अभियान को लेकर आयोजित हुई राष्ट्रीय बैठक

12 मई 2025 को इस अभियान की रूपरेखा तय करने हेतु दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और ICAR के 100 से अधिक अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हाइब्रिड मोड में भाग लिया। बैठक में सभी प्रतिनिधियों को अभियान की रूपरेखा, कार्यप्रणाली और लक्ष्य से अवगत कराया गया।

कृषि में अनुसंधान का लाभ खेतों तक पहुंचे: मंत्री

कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे इस अभियान को व्यक्तिगत दायित्व समझकर मन से करें, क्योंकि उनके कार्य का सीधा लाभ देश के लाखों किसानों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसानों में तकनीकी रुचि बढ़ेगी और वैज्ञानिकों को भी अपने अनुसंधान कार्य का प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिलेगा।

YuvaSahakar Desk