महाराष्ट्र सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को कृषि का दर्जा प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस संबंध में 9 मई 2025 को जारी सरकारी आदेश (जीआर) के अनुसार, मछुआरों, मछली पालकों और मत्स्य पालन से जुड़े हितधारकों को कृषि क्षेत्र के समान बुनियादी सुविधाएं और रियायतें उपलब्ध होंगी। इस कदम से राज्य के लगभग 4.83 लाख समुद्री और अंतर्देशीय मछुआरों को लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मत्स्य पालन और बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने इस निर्णय को “ऐतिहासिक और क्रांतिकारी” करार देते हुए कहा कि यह कदम महाराष्ट्र को मत्स्य उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। वर्तमान में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य पालन में छठे और अंतर्देशीय मत्स्य पालन में 17वें स्थान पर है। इस निर्णय से मछुआरों को बिजली पर कृषि दरों पर रियायत, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि दरों पर बैंक ऋण, कम लागत वाला बीमा और सौर ऊर्जा योजनाओं का लाभ मिलेगा। प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा या अत्यधिक वर्षा की स्थिति में मछुआरों को किसानों की तरह सरकारी राहत पैकेज भी प्रदान किया जाएगा।
सरकारी आदेश में मत्स्य पालन से जुड़े विभिन्न शब्दों जैसे मछुआरे, मत्स्य संवर्धक, मछली व्यवसायी, मछली बीज उत्पादक और मछली प्रबंधन पेशेवर को परिभाषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, मछली पालकों को आधुनिक तकनीकों जैसे एक्वाकल्चर के लिए वित्तीय सहायता, कोल्ड स्टोरेज और बर्फ कारखानों के लिए अनुदान भी उपलब्ध होंगे। यह निर्णय मत्स्य पालन क्षेत्र में रोजगार सृजन और आय वृद्धि को बढ़ावा देगा।
महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि के साथ-साथ संबद्ध क्षेत्रों जैसे पशुपालन और मत्स्य पालन पर निर्भर है। इस निर्णय से तटीय और अंतर्देशीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश (50.43% वृद्धि), छत्तीसगढ़ (32.15%), झारखंड (49.52%), बिहार (45.2%) और कर्नाटक (103.3%) ने मत्स्य पालन को कृषि सुविधाएं देकर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। महाराष्ट्र भी ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है।


