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जीविका दीदी: बिहार की ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी

बिहार की ग्रामीण महिलाएं अब दूध उत्पादन से आगे बढ़कर अपनी खुद की डेयरी यूनिट स्थापित कर रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल है।

Published: 13:55pm, 09 May 2025

बिहार की ग्रामीण महिलाएं अब डेयरी उद्योग में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। जीविका परियोजना के अंतर्गत जुड़ी महिलाएं अब दूध उत्पादन तक सीमित न रहकर अपनी खुद की डेयरी यूनिट की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड के बैनर तले यह पहल अब अपने स्वयं के ब्रांड के तहत दूध की पैकेजिंग और मार्केटिंग का नया अध्याय शुरू करने जा रही है।

इस प्रयास की शुरुआत वर्ष 2017 में मात्र 600 गांवों की 36,000 महिलाओं से हुई थी, जो अब बढ़कर दो लाख से अधिक महिलाओं तक पहुंच चुकी है। आज ये महिलाएं प्रतिदिन लगभग 80,000 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं और औसतन हर जीविका दीदी ₹11,000 प्रति माह की आय अर्जित कर रही हैं। सालाना टर्नओवर ₹13 लाख 768 तक पहुंच गया है।

अब तक जो दूध मदर डेयरी और सुधा जैसे ब्रांडों को भेजा जाता था, वह अब स्वयं की डेयरी में प्रोसेस कर बाजार में उतारा जाएगा। इसके लिए राज्यभर में मिल्क पुलिंग प्वाइंट्स की स्थापना की गई है, जहां से दूध संग्रह कर सीधे ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है।

इस परियोजना से जुड़ने के बाद कई दीदियों ने पशुपालन को व्यवसाय का रूप दिया है। पहले जिनके पास एक गाय थी, अब वे 3 से 5 गायों की स्वामिनी बन चुकी हैं। पशु चारे और पोषण की समुचित व्यवस्था के तहत अब तक 4898 मीट्रिक टन पशु आहार, 116 मीट्रिक टन मिनरल मिक्स, 110 मीट्रिक टन हरा चारा और 69,513 डी-वार्मर की आपूर्ति की गई है।

YuvaSahakar Desk

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