भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग की संयुक्त सचिव गुंजन कृष्णा ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले स्थित हलाली डैम का दौरा कर मत्स्य विकास गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय मछुआरों और सहकारी समिति के प्रतिनिधियों से बातचीत कर आजीविका, उत्पादन और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
हलाली डैम में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 300 से अधिक केज स्थापित किए गए हैं। इन केज के माध्यम से वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय मछुआरों के लिए आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।
संयुक्त सचिव ने सहकारी समिति के सदस्यों से संवाद के दौरान सामूहिक भागीदारी की भूमिका पर भी जोर दिया। सहकारी मॉडल स्थानीय मछुआरों को संगठित तरीके से उत्पादन, विपणन और संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है।
दौरे के दौरान उन्होंने डैम पर विकसित पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। यहां इंडियन मेजर कार्प सहित विभिन्न मछली प्रजातियों की हैंडलिंग, पैकिंग और डिस्पैच की व्यवस्था उपलब्ध है।
मछलियों को रेफ्रिजरेटेड वाहनों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों तक भेजा जा रहा है। इससे गुणवत्ता बनाए रखने, सुरक्षित परिवहन और बाजार संपर्क मजबूत करने में सहायता मिल रही है।
यह पहल हलाली डैम को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, सहकारी भागीदारी और बेहतर बाजार संपर्क के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


