ग्रामीण भारत में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में Rural Self Employment Training Institutes (RSETIs) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन संस्थानों का उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को व्यावहारिक कौशल देकर उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने या रोजगार हासिल करने के लिए तैयार करना है। देशभर में इस नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ है और आज 647 RSETI संचालित हैं, जिनकी पहुंच 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक है।
RSETI की सबसे बड़ी उपलब्धि बड़े पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षण से आजीविका तक पहुंचाना है। शुरुआत से अब तक इन संस्थानों के माध्यम से 63.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 45.60 लाख से अधिक उम्मीदवार सफलतापूर्वक आजीविका से जुड़ चुके हैं।
RSETI कार्यक्रम खास तौर पर ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें युवाओं को केवल तकनीकी या व्यवसायिक प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, बल्कि व्यवसाय शुरू करने, उसका प्रबंधन करने और उसे लंबे समय तक चलाने के लिए जरूरी जानकारी भी दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों को व्यवसाय स्थापित करने के लिए हैंडहोल्डिंग सपोर्ट भी उपलब्ध कराया जाता है। Pasted markdown
कार्यक्रम की खासियत यह है कि आजीविका से जुड़े उम्मीदवारों में बड़ी संख्या स्वरोजगार की ओर बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, स्थापित उम्मीदवारों में करीब 94 प्रतिशत ने स्वरोजगार आधारित गतिविधियां शुरू की हैं, जबकि लगभग 6 प्रतिशत को वेतन आधारित रोजगार मिला है।
इस तरह RSETI ग्रामीण युवाओं के लिए केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि कौशल से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता तक पहुंचाने वाला मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर ये संस्थान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं।


