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कोऑपरेटिव्स के लिए लोन लेना होगा आसान, लोकसभा में NCDC संशोधन विधेयक पेश

सहकारी समितियों से जुड़े किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज एवं अन्य वित्तीय मदद प्राप्त करना अब आसान हो जाएगा। सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के कामकाज का दायरा बढ़ाने के लिए लोकसभा में एनसीडीसी संशोधन विधेयक पेश किया है।

Published: 16:44pm, 11 Aug 2026

सहकारी समितियों से जुड़े किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज एवं अन्य वित्तीय मदद प्राप्त करना अब आसान हो जाएगा। सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के कामकाज का दायरा बढ़ाने के लिए लोकसभा में एनसीडीसी संशोधन विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की भूमिका का विस्तार करना और सहकारी क्षेत्र तक वित्तीय सहायता को अधिक तेज, लचीला और प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित बदलावों के तहत सहकारी समितियां वित्तीय सहायता की प्रमुख लाभार्थी बनी रहेंगी, लेकिन उनके विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं तक भी सहायता पहुंचाने के रास्ते खोले जाएंगे।

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से यह विधेयक पेश किया। विधेयक के जरिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। NCDC सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है, जो सहकारी समितियों द्वारा संचालित परियोजनाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।

1962 में कानून लागू होने के बाद इसमें अब तक 1973, 1974 और 2002 में तीन बार संशोधन किया जा चुका है। इन बदलावों के जरिए NCDC के वित्तीय संसाधनों में विविधता लाने, गतिविधियों का दायरा बढ़ाने, पात्र सहकारी समितियों को सीधे वित्त उपलब्ध कराने और अधिसूचित सेवाओं को उसके कार्यक्षेत्र में शामिल करने का प्रावधान किया गया था।

नए विधेयक में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव NCDC के दायरे को व्यापक बनाने से जुड़ा है। मौजूदा कानून के तहत निगम सहकारी समितियों के माध्यम से योजनाओं की योजना बनाता, उन्हें बढ़ावा देता और वित्त पोषित करता है। प्रस्तावित संशोधन में इसे व्यापक रूप से ‘सहकारी विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना, प्रोत्साहन और वित्तपोषण’ करने की शक्ति देने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि हाल के वर्षों में सहकारी क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारिता से जुड़े बुनियादी ढांचे, तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अनेक संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें से कई संस्थाएं स्वयं सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन उनका काम सीधे तौर पर सहकारी संस्थाओं को मजबूत करता है।

मौजूदा कानून में NCDC ऐसी संस्थाओं को सीधे वित्तीय सहायता नहीं दे सकता। इसके कारण धनराशि को राज्य सरकारों या सहकारी समितियों के माध्यम से भेजना पड़ता है, जिससे परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में देरी हो सकती है। नया विधेयक इस बाधा को दूर करने का प्रयास करता है।

विधेयक पारित होने के बाद NCDC सहकारी समितियों के साथ-साथ सहकारी विकास में लगी अन्य पात्र संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान दे सकेगा, बशर्ते सहायता का अंतिम लाभ सहकारी क्षेत्र को मिले। इसके अलावा केंद्र सरकार की मंजूरी से NCDC को सहकारी संगठनों की शेयर पूंजी में निवेश करने का अधिकार भी मिलेगा। किन संस्थाओं को ऐसी सहायता दी जा सकेगी, इसका निर्धारण NCDC बोर्ड करेगा।

विधेयक में कई अन्य प्रावधानों को भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बदलने का प्रस्ताव है। इसमें ‘खाद्य पदार्थ’ की परिभाषा का विस्तार कर प्रसंस्कृत खाद्य और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य खाद्य वस्तुओं को शामिल करने, औद्योगिक वस्तुओं से संबंधित भौगोलिक प्रतिबंध हटाने और नए सहकारी कानूनों के अनुरूप पुराने संदर्भों को संशोधित करने की बात कही गई है।

इसके साथ ही NCDC को भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य अधिसूचित वित्तीय संस्थानों के साथ ऋण संबंधी जानकारी जुटाने और साझा करने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी है। सरकार का मानना है कि इससे निगम की ऋण व्यवस्था अधिक मजबूत और प्रभावी होगी।

यदि संसद से विधेयक को मंजूरी मिलती है, तो NCDC को सहकारी आंदोलन से जुड़े व्यापक संस्थागत ढांचे को वित्तपोषित करने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। साथ ही, वर्तमान व्यवस्था में राज्य सरकारों या सहकारी समितियों के माध्यम से धन पहुंचाने के कारण होने वाली प्रक्रियागत देरी को कम करने में भी मदद मिलेगी।

Jitendra