उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच एजुकेशन लोन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर सभी शिक्षा ऋण योजनाओं को मिलाकर 6,45,514 आवेदन पहुंचे। इनमें अकेले पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के लिए 1,10,667 आवेदन थे। इनमें 70,852 लोन स्वीकृत हुए और 67,728 छात्रों को लोन वितरित किया जा चुका है। यानी आवेदन के मुकाबले करीब 64% लोन स्वीकृत हुए और करीब 61% आवेदकों तक राशि पहुंची। स्वीकृत ऋणों में लगभग 95.6% का वितरण हो चुका था।
7.5 लाख की सीमा को समझना जरूरी
पेपर कटिंग में “7.5 लाख रुपए तक बिना सिक्योरिटी” का उल्लेख है, लेकिन पीएम विद्यालक्ष्मी के नियम इससे कुछ अधिक व्यापक हैं। योजना के पात्र Quality Higher Education Institutions यानी QHEIs में मेरिट के आधार पर प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए ऋण बिना कोलैटरल और बिना थर्ड-पार्टी गारंटर उपलब्ध है। सरकार ने ऋण की कोई निश्चित अधिकतम सीमा तय नहीं की है; राशि कोर्स फीस और पढ़ाई से जुड़े स्वीकार्य खर्च के अनुसार तय हो सकती है। ₹7.5 लाख की सीमा दरअसल उस राशि से जुड़ी है, जिस पर सरकार बैंक को 75% क्रेडिट गारंटी देती है।
योजना का दूसरा बड़ा लाभ ब्याज में राहत है। जिन छात्रों की सालाना पारिवारिक आय ₹8 लाख से कम है, उन्हें ₹10 लाख तक के ऋण पर मोरेटोरियम अवधि के दौरान 3% ब्याज सब्सिडी मिल सकती है। इसके लिए हर साल अधिकतम एक लाख नए छात्रों का प्रावधान है। वहीं ₹4.5 लाख तक पारिवारिक आय वाले पात्र तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए पीएम-USP CSIS के तहत मोरेटोरियम अवधि में पूर्ण ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है।
पढ़ाई के बाद मिलता है लंबा समय
एजुकेशन लोन चुकाने के लिए विद्यार्थी को पढ़ाई पूरी होते ही EMI शुरू करने की जरूरत नहीं होती। योजना में कोर्स अवधि और उसके बाद एक वर्ष का मोरेटोरियम मिलता है। इसके बाद ऋण चुकाने के लिए अधिकतम 15 वर्ष का समय दिया जा सकता है। वर्तमान में पीएम विद्यालक्ष्मी के दायरे में 1,425 उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। सरकार ने 2024-25 से 2030-31 के बीच पीएम विद्यालक्ष्मी के लिए ₹3,600 करोड़ का प्रावधान किया है और सात वर्षों में लगभग 7 लाख नए छात्रों को ब्याज सब्सिडी का लाभ देने का अनुमान है।


