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भारत ने कृषि विकास में चीन को पछाड़ा: नीति आयोग रिपोर्ट

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2015 से 2024 के मध्य भारत की कृषि विकास दर 4.42 प्रतिशत रही, जो चीन की 4.10 प्रतिशत की विकास दर से स्पष्ट रूप से अधिक है।

Published: 12:34pm, 12 Jan 2026

कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार और नीतिगत हस्तक्षेपों के चलते भारत ने बीते एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट ‘उभरते भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने में कृषि’ में यह स्पष्ट किया गया है कि कृषि विकास के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है और किसानों की आय में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2024-25 के बीच ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब देश की कृषि आय में गिरावट दर्ज की गई हो। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस अवधि में देश ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, जलवायु चुनौतियों और कोरोना महामारी जैसी अभूतपूर्व परिस्थितियों का सामना किया। महामारी के दौरान जब अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं, तब भी कृषि क्षेत्र ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की।

कृषि विकास दर में चीन से आगे भारत

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015 से 2024 के बीच भारत की कृषि विकास दर औसतन 4.42 प्रतिशत रही, जबकि इसी अवधि में चीन की कृषि विकास दर 4.10 प्रतिशत रही। रमेश चंद के अनुसार, 2014-15 से 2024-25 का कालखंड भारतीय कृषि इतिहास में सबसे तेज और स्थिर विकास का दौर रहा है। इस दौरान कृषि क्षेत्र ने न केवल उत्पादन बढ़ाया बल्कि रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाई, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं के लिए।

किसानों की आय में 126 प्रतिशत की बढ़ोतरी

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बीते दस वर्षों में किसानों की आय में 126 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 2014-15 से 2023-24 के बीच कृषि उत्पादकों की आय औसतन 10.11 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ी, जो विनिर्माण क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से अधिक है। यह संकेत करता है कि कृषि क्षेत्र अब केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि आय और समृद्धि का मजबूत आधार बन रहा है।

विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की केंद्रीय भूमिका

रमेश चंद ने रिपोर्ट में कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, प्रति व्यक्ति आय को विकसित देशों के स्तर तक पहुंचाना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना। इस परिवर्तन में कृषि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र देश की राष्ट्रीय आय में लगभग 19.73 प्रतिशत का योगदान देता है और कुल कार्यबल के करीब 46 प्रतिशत लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

दूध, फल और सब्जी उत्पादन में भी अग्रणी भारत

रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 में 146 मिलियन टन रहा दूध उत्पादन 2023-24 में बढ़कर 239 मिलियन टन से अधिक हो गया है, जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना हुआ है। इसी प्रकार फल और सब्जी उत्पादन 2013-14 के 280.7 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 में 367.72 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को जोखिम से सुरक्षा मिली है। योजना का कवरेज 2018-19 में 3.4 करोड़ किसानों से बढ़कर 2024-25 में 4.1 करोड़ किसानों तक पहुंच गया है, जिससे खेती को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया गया है।

समग्र रूप से यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कृषि क्षेत्र भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है और विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में इसकी भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

YuvaSahakar Desk

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