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एग्री क्लीनिक और एग्री बिजनेस सेंटर योजना: ग्रामीण भारत में कृषि और रोजगार की नई दिशा

भारत सरकार का कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय किसानों को निजी कृषि विस्तार सेवाएं प्रदान करने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के उद्देश्य से "एग्री क्लीनिक एवं एग्री बिजनेस सेंटर (ACABC)" योजना चला रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रशिक्षित युवाओं द्वारा गांवों में कृषि परामर्श, कीट नियंत्रण, मिट्टी परीक्षण, बीज-उर्वरक आपूर्ति, और कृषि यंत्रों की सुविधा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

Published: 14:19pm, 22 Jul 2025

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एग्री क्लीनिक और एग्री बिजनेस सेंटर (ACABC) योजना भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विस्तार सेवाओं को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने की एक महत्वाकांक्षी पहल है। 2002 में शुरू की गई यह योजना राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (MANAGE) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, परामर्श, और संसाधनों तक पहुंच प्रदान करना है, साथ ही ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना ग्रामीण भारत में कृषि सुधार और आर्थिक विकास की दिशा में एक ठोस कदम है।

एसीएबीसी योजना का उद्देश्य

एसीएबीसी योजना का प्राथमिक लक्ष्य सार्वजनिक कृषि विस्तार सेवाओं को पूरक बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी विस्तार सेवाओं को बढ़ावा देना है। यह योजना किसानों को निम्नलिखित क्षेत्रों में सहायता प्रदान करती है:

  • कृषि परामर्श: फसल चयन, मिट्टी परीक्षण, कीट नियंत्रण, और रोग प्रबंधन।

  • बाजार जानकारी: फसलों के बाजार मूल्य, मांग, और विपणन रणनीतियाँ।

  • कृषि संसाधन: बीज, उर्वरक, और यंत्रीकृत उपकरणों की आपूर्ति।

  • पशु स्वास्थ्य सेवाएँ: पशुओं के लिए नैदानिक सेवाएँ, चारा प्रबंधन, और टीकाकरण।
    इसके अतिरिक्त, यह योजना ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है, जिससे वे अपने समुदायों में कृषि सेवाएँ प्रदान कर सकें और आय अर्जित कर सकें।

प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता

एसीएबीसी योजना के तहत पात्र युवाओं को MANAGE द्वारा मान्यता प्राप्त नोडल प्रशिक्षण संस्थानों (NTIs) में 45 दिनों का निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह प्रशिक्षण कृषि स्नातकों, डिप्लोमा धारकों, और संबद्ध क्षेत्रों में स्नातकोत्तर डिग्री धारकों के लिए उपलब्ध है। प्रशिक्षण में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:

  • परियोजना प्रबंधन और लेखा रखरखाव।

  • बाजार सर्वेक्षण और व्यक्तित्व विकास।

  • कृषि संस्थानों और सफल उद्यमियों के भ्रमण।

  • डिजिटल तकनीकों और इंटरनेट का उपयोग।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, लाभार्थी अपने एग्री क्लीनिक या एग्री बिजनेस सेंटर स्थापित करने के लिए विशेष स्टार्ट-अप ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये और समूह परियोजनाओं (5 प्रशिक्षित व्यक्तियों के समूह) के लिए 100 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, सामान्य वर्ग के लिए 36% और महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति, उत्तर-पूर्वी राज्यों, और पहाड़ी क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए 44% की बैक-एंडेड सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एग्री क्लीनिक और एग्री बिजनेस सेंटर की भूमिका

एग्री क्लीनिक: ये केंद्र किसानों को विशेषज्ञ सलाह और सेवाएँ प्रदान करते हैं, जैसे मिट्टी और पानी की गुणवत्ता का परीक्षण, कीट प्रबंधन, फसल बीमा, और पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीक। ये सेवाएँ फसलों और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करती हैं।
एग्री बिजनेस सेंटर: ये व्यावसायिक इकाइयाँ हैं, जो कृषि उपकरणों की कस्टम हायरिंग, इनपुट्स की बिक्री, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, और बाजार लिंकेज जैसी सेवाएँ प्रदान करती हैं। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और आय सृजन को बढ़ावा देते हैं।

पात्रता मानदंड

एसीएबीसी योजना में आवेदन करने के लिए निम्नलिखित शैक्षिक योग्यताएँ आवश्यक हैं:

  • स्नातक डिग्री: कृषि और संबद्ध विषयों (जैसे बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, डेयरी) में स्नातक डिग्री, जो SAUs, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR, या UGC द्वारा मान्यता प्राप्त हो।

  • डिप्लोमा/पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा: कृषि या संबद्ध क्षेत्रों में कम से कम 50% अंकों के साथ डिप्लोमा, जो राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विभागों, या तकनीकी शिक्षा विभागों द्वारा प्रदान किया गया हो। अन्य एजेंसियों के डिप्लोमा को भारत सरकार के कृषि और सहकारिता विभाग की स्वीकृति और राज्य सरकार की सिफारिश पर मान्यता दी जाती है।

  • स्नातकोत्तर डिग्री: जैविक विज्ञान में स्नातक के साथ कृषि या संबद्ध विषयों में स्नातकोत्तर।

  • विशेष पाठ्यक्रम: UGC मान्यता प्राप्त डिग्री/डिप्लोमा, जिसमें 60% से अधिक सामग्री कृषि और संबद्ध विषयों से संबंधित हो।

  • आयु सीमा: आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

YuvaSahakar Desk

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