केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि देशभर में 229 सक्रिय सहकारी चीनी मिलें (CSMs) हैं, जो मिलकर भारत के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 30% योगदान देती हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारी चीनी मिलें वर्तमान में कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिनमें मौजूदा टर्म लोन और कार्यशील पूंजी ऋण का भुगतान शामिल है। उनकी लाभप्रदता बढ़ाने के लिए, उन्हें अतिरिक्त राजस्व स्रोत के रूप में एथेनॉल उत्पादन को अपनाना होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
अमित शाह ने बताया कि राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018, जिसे 2022 में संशोधित किया गया था, के तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (EBP-20) का लक्ष्य वर्ष 2030 से घटाकर एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025–26 कर दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 1,120 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि चीनी उद्योग देश के सबसे बड़े कृषि-आधारित प्रसंस्करण क्षेत्रों में से एक है, जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके आश्रितों का समर्थन करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास में चीनी उद्योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह किसानों एवं ग्रामीण आबादी की आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है।


